देहरादून। सावन का महीना हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के नाम से जाना जाता है, जो हर साल जुलाई-अगस्त के बीच आता है। यह माह शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दौरान शिवभक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं और मांसाहार से दूर रहते हैं।
क्यों होता है सावन खास?
श्रावण मास की महिमा पुराणों में भी वर्णित है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय जब विष निकला था, तब भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया था। इससे उनका शरीर गर्म हो गया और उस गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। तभी से श्रावण मास में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
व्रत रखने की परंपरा
सावन के सोमवार का व्रत विशेष रूप से किया जाता है। महिलाएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं। पुरुष भी इस माह में व्रत रखकर शिव की आराधना करते हैं।
इस महीने में सिर्फ सोमवार ही नहीं, बल्कि पूरा महीना व्रत, उपवास और संयम का प्रतीक माना जाता है। लोग बिना नमक, फलाहार या केवल एक बार भोजन करते हैं।
सावन में मांसाहार क्यों नहीं किया जाता?
सावन को सात्विकता और पवित्रता का महीना माना गया है। धार्मिक दृष्टिकोण से इस दौरान मांस, मछली, अंडा या शराब का सेवन वर्जित होता है। इसका एक वैज्ञानिक कारण भी है। इस मौसम में वर्षा होती है, जिससे जलजनित बीमारियां फैलती हैं। मांसाहार जल्दी खराब हो सकता है और इससे संक्रमण की आशंका रहती है। इसलिए शरीर को शुद्ध और रोगमुक्त रखने के लिए सात्विक आहार की सलाह दी जाती है।
शिवभक्तों में उमड़ता है उत्साह
इस महीने में कांवड़ यात्रा का भी विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु विभिन्न तीर्थ स्थलों से गंगाजल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। मंदिरों में विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
सावन का महीना केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि संयम, स्वच्छता और प्रकृति के साथ सामंजस्य रखने का अवसर भी है। यह माह हमें शरीर और मन की शुद्धता, भगवान शिव के प्रति भक्ति और समाज में सद्भाव का संदेश देता है।