हल्द्वानी: उत्तराखंड में गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों की महिलाएं शराब के ठेकों के खिलाफ सड़कों पर उतर आई हैं। इस विरोध की वजह राज्य के धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों के पास शराब की दुकानों का प्रस्ताव है, जिसे स्थानीय लोग स्वीकार नहीं कर रहे। ग्रामीण और महिलाएं इसे युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताते हुए पूर्ण प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं।
कैंची धाम में विरोध
कैंची धाम (रातीघाट) में प्रस्तावित शराब की दुकान के विरोध में स्थानीय लोग और महिलाओं ने आवाज बुलंद की। उनका कहना है कि यह बाजार धार्मिक स्थल के निकट है और आसपास कई विद्यालय स्थित हैं। महिलाओं का कहना है कि शराब की दुकान खुलने से माहौल दूषित होगा और युवा पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
गंगोत्री मार्ग के झाला में विरोध
उत्तरकाशी जिले में इस वर्ष तीन नई शराब की दुकानों का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें झाला, आराकोट और सांकरी शामिल हैं। गंगोत्री मार्ग पर स्थित झाला में प्रस्तावित शराब के ठेके का विरोध स्थानीय लोगों के साथ ही राजनीतिक दलों ने भी किया। उनका कहना है कि गंगोत्री धाम की पवित्रता बनाए रखने के लिए ठेके को निरस्त किया जाना चाहिए। पिछले साल हर्षिल में शराब का ठेका प्रस्तावित था, लेकिन विरोध के चलते वह नहीं खुला। इस बार ग्रामीणों ने उसी तरह विरोध में अपनी आवाज बुलंद की है।
केदारघाटी में रोजाना प्रदर्शन
केदारघाटी में महिलाएं रोज जुलूस निकालकर अवैध शराब वितरण के खिलाफ विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने अवैध शराब पर कार्रवाई नहीं की, तो पूरे इलाके में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
बेरीनाग में विरोध
बेरीनाग के उडियारी बैंड में प्रस्तावित शराब की दुकान को लेकर लोगों ने स्पष्ट किया कि किसी भी कीमत पर शराब की दुकान नहीं खुलने देंगे। गंगोलीहाट की पूर्व विधायक मीना गंगोला ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर शराब के ठेकों की आवंटन प्रक्रिया रद्द करने की मांग की।
महिलाओं और ग्रामीणों की मांग
स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों का कहना है कि धार्मिक स्थलों के आसपास शराब ठेके नहीं होने चाहिए। उनका तर्क है कि यह युवा पीढ़ी के लिए खतरनाक है और सामाजिक वातावरण को दूषित करता है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि ठेकों की अनुमति को तुरंत रद्द किया जाए और अवैध शराब वितरण पर सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रशासन और पुलिस पर दबाव
स्थानीय लोगों और महिलाओं ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया, तो और बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा। प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि विरोध को देखते हुए ठेकों को खोलने की प्रक्रिया रोकी जाए और कानून व्यवस्था बनाए रखी जाए।