उत्तराखंड हाई कोर्ट ने ‘मोहम्मद’ दीपक कुमार की पुलिस सुरक्षा याचिका खारिज की, कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार

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नैनीताल : उत्तराखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को ‘मोहम्मद’ दीपक कुमार की पुलिस सुरक्षा की मांग पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने सवाल उठाया कि एक आरोपी कैसे अपने खिलाफ चल रहे मामले में विशेष पुलिस सुरक्षा की मांग कर सकता है। दीपक कुमार ने अपनी याचिका के जरिए पुलिस पर दबाव डालने का प्रयास किया था, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।

कोर्ट का रुख और फटकार

कोर्ट की पीठ, न्यायाधीश राकेश थपलियाल की एकलपीठ, ने दीपक कुमार को मौखिक रूप से फटकार लगाते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं तो वे पुलिस सुरक्षा की मांग कैसे कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी को विशेष सुरक्षा देने का कोई औचित्य नहीं है। दीपक कुमार ने अपने तर्कों को पेश करने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि किसी आरोपी को मामलों की गंभीरता को देखते हुए कोई विशेष राहत नहीं दी जा सकती।

मामला क्या है?

दीपक कुमार पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इससे पहले भी उन्हें कई बार हिरासत में लिया जा चुका है। मामले की पृष्ठभूमि यह है कि दीपक कुमार ने कोटद्वार के बहुचर्चित विवाद के दौरान एक याचिका दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने पुलिस कार्रवाई की समीक्षा, परिवार की सुरक्षा और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की थी।

वायरल वीडियो में दीपक कुमार ने विवादित विवाद में अपनी मौजूदगी दिखाई और अपनी पहचान ‘मोहम्मद दीपक’ बताई। इस वीडियो के बाद उन्हें कई लोगों का समर्थन मिला और कुछ छोटे चंदे भी प्राप्त हुए। इसके बाद पुलिस ने दीपक और 22 अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए।

पुलिस प्रशासन और सुरक्षा की मांग

कोर्ट ने कहा कि यदि कोई आरोपी अत्यधिक खतरे में महसूस करता है, तो पहले अपने मामले का समाधान करे। किसी आरोपी द्वारा पुलिस सुरक्षा की मांग करना सामान्य नहीं है और इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस प्रशासन को ठीक प्रकार से कार्रवाई करनी चाहिए ताकि कानून व्यवस्था और जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो।

विवाद और कानूनी चर्चा

यह मामला उत्तराखंड में बड़े विवाद में बदल गया है। कानूनी विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं कि क्या एक आरोपी की ओर से पुलिस सुरक्षा मांगना सही है या नहीं। दीपक के वकील का कहना है कि हर आरोपी को अपनी सुरक्षा की मांग का अधिकार है, लेकिन कोर्ट ने इसे असंगत बताया।

अगली सुनवाई

हालांकि कोर्ट ने दीपक की याचिका को खारिज कर दिया है, लेकिन मामले की अगली सुनवाई का इंतजार है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दीपक आगे किसी अन्य कानूनी उपाय का सहारा लेते हैं या नहीं।

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