देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी डॉक्टर अब शाम के समय सरकारी अस्पतालों में मरीजों को देख सकेंगे। सरकार सरकारी अस्पतालों में ही डॉक्टरों को सशर्त निजी प्रैक्टिस की अनुमति देने की तैयारी कर रही है। इसका मकसद मरीजों को शाम के समय भी कम खर्च में इलाज उपलब्ध कराना और सरकारी अस्पतालों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
राज्य में वर्तमान में सरकारी डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस करने पर रोक है। इसके बदले डॉक्टरों को वेतन के साथ नॉन प्रैक्टिस अलाउंस दिया जाता है। इसके बावजूद कई डॉक्टर अपने आवास या निजी क्लीनिक में प्रैक्टिस करते हैं। इसे देखते हुए सरकार अब सरकारी अस्पताल परिसर में ही शाम के समय मरीज देखने की व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है।
नई व्यवस्था पूरी तरह ऐच्छिक होगी। इसके तहत डॉक्टरों को तीन प्रमुख शर्तों का पालन करना होगा। मरीजों से न्यूनतम फीस ली जाएगी, मरीजों के ऑपरेशन या अन्य जरूरी उपचार सरकारी अस्पताल में ही किए जाएंगे और डॉक्टर बाहर से दवाएं लिखकर मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर की ओर नहीं भेज सकेंगे।
डॉक्टरों को सरकारी अस्पताल परिसर के बाहर निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं होगी। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है। जल्द ही प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों को शाम के समय सरकारी अस्पतालों में सशर्त प्रैक्टिस की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में जल्द अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से मरीजों को शाम के समय भी सरकारी अस्पतालों में सस्ता इलाज मिल सकेगा। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में इसका लाभ अधिक मिलने की उम्मीद है, जहां कई सरकारी अस्पताल दोपहर दो बजे के बाद खाली हो जाते हैं।
नई व्यवस्था लागू होने पर डॉक्टरों को मरीज देखने के लिए सरकारी अस्पताल में ही उचित स्थान मिलेगा और अस्पताल के संसाधनों का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। इससे मरीजों को निजी क्लीनिकों में महंगा इलाज कराने के बजाय सरकारी अस्पताल में ही कम खर्च पर उपचार की सुविधा मिल सकेगी।