उत्तराखंड मौसम अपडेट। उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मौसम विभाग ने 14 से 17 अगस्त तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। देहरादून, बागेश्वर और नैनीताल में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग के निदेशक डॉ. सीएस तोमर के मुताबिक अगले कुछ दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों से मौसम की स्थिति पर नजर रखने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने की आशंका को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए देहरादून, पिथौरागढ़ और नैनीताल में शुक्रवार को स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है। पिथौरागढ़ और नैनीताल प्रशासन ने कक्षा एक से 12 तक संचालित शासकीय, अर्द्धशासकीय और निजी विद्यालयों के साथ सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने के आदेश जारी किए हैं।
बारिश के अलर्ट के बीच उत्तराखंड में भू-धंसाव और भूस्खलन का खतरा भी चिंता बढ़ा रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश में 461 से अधिक गांव अति-संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में जमीन में दरारें पड़ने, भू-धंसाव और भूस्खलन की घटनाएं सामने आती रही हैं।
पिथौरागढ़ का धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्र, उत्तरकाशी का भटवाड़ी और वरुणावत क्षेत्र तथा नैनीताल का बलियानाला भी संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हैं। वहीं भूस्खलन के लिहाज से रुद्रप्रयाग और चमोली जिले भी बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। रुद्रप्रयाग की केदारनाथ घाटी, ऊखीमठ और गुप्तकाशी क्षेत्र के कई गांव भू-धंसाव की समस्या से प्रभावित हैं।
चमोली में जोशीमठ के बाद थराली, पोखरी और पीपलकोटी क्षेत्र के कई गांवों पर भी भू-धंसाव और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। लगातार बारिश के दौरान इन संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड की हिमालयी भूगर्भीय संरचना बेहद संवेदनशील है। मेन सेंट्रल थ्रस्ट जैसी फॉल्ट लाइनों के कारण कई क्षेत्रों की चट्टानें कमजोर हैं। ऐसे में कम समय में होने वाली अत्यधिक बारिश, बादल फटने और जल निकासी की समस्या से पहाड़ी ढलानों पर दबाव बढ़ जाता है।
इसके अलावा बिना वैज्ञानिक अध्ययन के निर्माण, पहाड़ों की क्षमता के अनुरूप योजना के बिना बहुमंजिला भवनों का निर्माण तथा पानी और सीवरेज की उचित निकासी नहीं होने से भी भू-धंसाव का खतरा बढ़ रहा है।
मौसम विभाग के अलर्ट के बीच प्रशासन की चुनौती अब दोहरी है। एक ओर भारी बारिश से निपटने की तैयारी करनी है, वहीं दूसरी ओर पहले से संवेदनशील गांवों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखनी होगी। स्थानीय प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव दल को तत्काल सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं।