उत्तराखंड। उत्तराखंड में जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत भवनों की स्व-गणना की शुरुआत 10 अप्रैल से होगी। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) इस अभियान का शुभारंभ करेंगे।
बुधवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में सचिव जनगणना दीपक कुमार और निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जनगणना के प्रथम चरण—मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना—का कार्य 25 अप्रैल से 24 मई तक चलेगा। इससे पहले 10 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच नागरिकों को स्व-गणना का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in पर लॉगिन कर जानकारी भरनी होगी।
30,839 कार्मिक होंगे तैनात
पहले चरण में 4,491 सुपरवाइजर और 26,348 प्रगणक समेत कुल 30,839 कर्मियों की तैनाती की गई है। ये टीमें 25 अप्रैल से 24 मई तक घर-घर जाकर मकान सूचीकरण और मकान गणना का कार्य करेंगी।
पोर्टल पर 16 क्षेत्रीय भाषाओं में सवालों के जवाब देने की सुविधा उपलब्ध होगी। स्व-गणना के बाद नागरिकों को एक यूनिक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी (SE ID) प्राप्त होगी, जिसे प्रगणक को दिखाना अनिवार्य होगा।
हिमाच्छादित जिलों में सितंबर में होगी गणना
दूसरे चरण में हिमाच्छादित जिलों—चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी—के 131 गांवों और तीन नगरीय क्षेत्रों में 11 से 30 सितंबर के बीच जनगणना कराई जाएगी।
बंद मकानों की भी होगी एंट्री
पहाड़ी क्षेत्रों में यदि मकान बंद या खंडहर अवस्था में मिलते हैं तो उन्हें “लॉक हाउस” के रूप में दर्ज किया जाएगा।
प्रशिक्षण की व्यापक व्यवस्था
प्रदेशभर में प्रगणकों और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण 650 बैचों में चल रहा है। राज्य में दो नेशनल ट्रेनर, 23 मास्टर ट्रेनर और 555 फील्ड ट्रेनर प्रशिक्षण दे रहे हैं।
सचिव की अपील
सचिव जनगणना दीपक कुमार ने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में स्व-गणना में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने बताया कि इस बार पूरी प्रक्रिया मोबाइल एप आधारित होगी। आंकड़ों के संकलन और निगरानी के लिए जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (CMMS पोर्टल) का उपयोग किया जाएगा।
प्रेसवार्ता में संयुक्त निदेशक एसएस नेगी, उप निदेशक तान्या सेठ, आरके बनवारी, प्रवीन कुमार और पीआईबी के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल भी उपस्थित रहे।