साल 2025 का दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण कल यानी 7 सितंबर 2025 को लगने जा रहा है। इस खगोलीय घटना का इंतजार लंबे समय से हो रहा था क्योंकि इस बार का ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा।
चंद्रग्रहण क्यों लगता है?
खगोल विज्ञान के अनुसार, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है, तो चंद्रग्रहण लगता है। इस दौरान चंद्रमा कुछ देर के लिए धुंधला या लालिमा लिए नजर आता है।
पहला चंद्रग्रहण कब लगा था?
इस साल का पहला चंद्रग्रहण 14 मार्च 2025 को लगा था, लेकिन वह भारत में दिखाई नहीं दिया। ऐसे में 7 सितंबर का चंद्रग्रहण ही देश के लोगों के लिए खास अवसर होगा।
कब और कहां दिखेगा?
यह ग्रहण एशिया, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में इसे रात 8:45 बजे से शुरू होकर आधी रात तक देखा जा सकेगा।
सूतक काल कब से शुरू होगा?
हिंदू धर्म के अनुसार, चंद्रग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले यानी 7 सितंबर की सुबह 11:45 बजे से शुरू हो जाएगा। सूतक काल में मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और धार्मिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। गर्भवती महिलाओं को खास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
किन राशियों पर असर?
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक यह चंद्रग्रहण मुख्य रूप से मीन, कन्या और धनु राशि के जातकों को प्रभावित कर सकता है।
मीन राशि: मानसिक तनाव और अनावश्यक खर्च की संभावना।
कन्या राशि: स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें।
धनु राशि: करियर और व्यापार में उतार-चढ़ाव संभव।
वहीं, वृषभ, सिंह और मकर राशि के जातकों के लिए यह समय शुभ होगा।
वृषभ: आर्थिक लाभ और रुके हुए काम पूरे होंगे।
सिंह: मान-सम्मान और पद में वृद्धि की संभावना।
मकर: परिवार में खुशियां और नई जिम्मेदारियां मिलेंगी।
विज्ञान बनाम आस्था
वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रग्रहण केवल एक खगोलीय घटना है, जिसका मानव जीवन पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता। लेकिन भारतीय समाज में इसे धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण लोग ग्रहण के समय पूजा-पाठ, मंत्र जप, स्नान और दान करते हैं और मान्यता है कि इससे नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।