नई दिल्ली, 22 जुलाई 2025:सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न से जुड़ी धारा 498A IPC के तहत दर्ज मामलों में अब तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि गिरफ्तारी से पहले दो महीने का कूलिंग ऑफ पीरियड अनिवार्य होगा और फैमिली वेलफेयर कमेटी (FWC) की रिपोर्ट आने के बाद ही कोई कार्रवाई होगी।
धारा 498A क्या है?
यह भारतीय दंड संहिता की वह धारा है जिसके तहत पति या ससुरालवालों द्वारा दहेज के लिए की गई क्रूरता या उत्पीड़न के मामलों में सजा दी जाती है। यह एक गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादी एक सामाजिक संस्था है और उसे कानून के माध्यम से तोड़ने के बजाय, सुलह-सफाई का मौका दिया जाना जरूरी है। कोर्ट ने माना कि हाल के वर्षों में 498A का दुरुपयोग बढ़ा है। NCRB के अनुसार, 70% से अधिक मामले झूठे या पक्षपातपूर्ण पाए गए हैं।
अब 498A के तहत दर्ज मामलों में सबसे पहले मामला FWC के पास भेजा जाएगा, जो दो महीने में अपनी रिपोर्ट पुलिस और मजिस्ट्रेट को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर ही गिरफ्तारी होगी। हालांकि, गंभीर खतरे की स्थिति में मजिस्ट्रेट तत्काल सुरक्षा आदेश दे सकते हैं।
फैसले की सराहना करते हुए वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने कहा कि यह समाज में संतुलन बनाए रखने वाला निर्णय है, जो निर्दोष लोगों को राहत देगा। वहीं कुछ महिला संगठनों ने चिंता जताई है कि इससे असली पीड़िताओं को न्याय मिलने में देर हो सकती है।