मदरसों में फर्जी नामांकन के खुलासे के बाद एक्शन, पांच जिलों के स्कूलों में मिड डे मील और छात्र संख्या की होगी जांच

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देहरादून: हरिद्वार जिले के मदरसों में हजारों फर्जी नामांकन मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने अब सरकारी स्कूलों और मदरसों में मिड डे मील योजना की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा महानिदेशालय और संबंधित मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) को छात्र संख्या और मिड डे मील वितरण की सत्यता जांचने के आदेश जारी किए हैं।

 

दरअसल, हाल ही में हरिद्वार जिला प्रशासन की जांच में मदरसों में दर्ज छात्र संख्या और वास्तविक उपस्थिति में बड़ा अंतर सामने आया था। जांच के दौरान 12,289 बच्चों का नामांकन फर्जी पाया गया, जिसके बाद शासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अन्य जिलों में भी जांच का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है।

 

पांच जिलों में होगी विशेष जांच

 

शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, देहरादून, पौड़ी जिले के कोटद्वार तथा नैनीताल जिले के हल्द्वानी और रामनगर क्षेत्र के सरकारी स्कूलों और मदरसों में जांच की जाएगी। जांच टीम यह सत्यापित करेगी कि स्कूलों में वास्तविक छात्र संख्या कितनी है और उसी अनुपात में मिड डे मील तैयार एवं वितरित किया जा रहा है या नहीं।

 

इस जांच में शिक्षा महानिदेशालय, पीएम पोषण कार्यालय और संबंधित जिलों के सीईओ शामिल रहेंगे।

 

एक महीने में 12 हजार से अधिक नामांकन हुए गायब

 

अधिकारियों के अनुसार मार्च 2026 में हरिद्वार जिले के मदरसों के अभिलेखों में 31,780 छात्रों का नामांकन दर्ज था। लेकिन अप्रैल 2026 में की गई जांच के दौरान यह संख्या घटकर 19,491 रह गई। इस तरह 12,289 नामांकन फर्जी पाए गए।

 

जांच में यह भी सामने आया कि कई मदरसों को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की योजनाओं के साथ-साथ मिड डे मील योजना का भी लाभ मिल रहा था।

 

गलत भुगतान की होगी वसूली

 

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अनुसार जिन संस्थानों में छात्र संख्या और मिड डे मील वितरण में गड़बड़ी पाई जाएगी, उनसे सरकारी धनराशि की वसूली की जाएगी। साथ ही अन्य जिलों के मदरसों की भी जांच जारी है।

 

लाखों बच्चों को मिल रहा है योजना का लाभ

 

प्रदेश में प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत सरकारी, सहायता प्राप्त स्कूलों और मदरसों में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है। वर्ष 2025-26 में योजना के तहत 5,57,199 छात्र-छात्राओं को लाभ मिला, जिनमें 3,15,579 प्राथमिक और 2,41,620 उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यार्थी शामिल हैं।

 

शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल सती ने कहा कि जिन जिलों में जांच के निर्देश दिए गए हैं, वहां वास्तविक छात्र संख्या और मिड डे मील वितरण का मिलान किया जाएगा। यदि कहीं अनियमितता पाई गई तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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