चंपावत: उत्तराखंड के चंपावत जिले के बनबसा क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति वर्ग की पूर्व महिला ग्राम प्रधान को जूतों की माला पहनाकर अपमानित करने के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। विशेष सत्र न्यायालय (SC-ST कोर्ट) ने मामले में 5 महिलाओं समेत सभी 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए 5-5 साल के साधारण कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता को कुल 2 लाख रुपये की प्रतिकर राशि देने के भी आदेश दिए हैं।
मामला जुलाई 2024 का है। बाढ़ और आपदा के बाद प्रशासन की ओर से राहत सामग्री वितरण के दौरान पूर्व ग्राम प्रधान को सहयोग के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि मौके पर पहुंचने से पहले कुछ ग्रामीणों के उकसावे पर आरोपियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता की। इस दौरान जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें जूतों की माला पहनाकर अपमानित किया गया था।
पीड़िता की शिकायत पर बनबसा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई विशेष सत्र न्यायाधीश/जिला जज अनुज कुमार संगल की अदालत में हुई।
5 महिलाओं समेत 10 आरोपी दोषी
अदालत ने हेमा खड़ायत, लीला दिगारी, जानकी कलौनी, दिनेश कलौनी, रोहित जेम्स, पिंकी जेम्स उर्फ सारिका, निखिल जेम्स उर्फ अमन, संजीव सिंह, निर्मला दिगारी और संदीप लॉरेंस को दोषी करार दिया है। सभी आरोपी गुदमी, बनबसा क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।
SC-ST एक्ट समेत कई धाराओं में सजा
अदालत ने SC-ST एक्ट की धारा 3(1)(D) के तहत प्रत्येक दोषी को 5 वर्ष के साधारण कारावास के साथ 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं धारा 3(1)(M), 3(1)(R) और 3(1)(S) के तहत प्रत्येक धारा में 2-2 वर्ष का साधारण कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा BNS की विभिन्न धाराओं के तहत भी अर्थदंड लगाया गया है।
पीड़िता को मिलेगी 2 लाख रुपये की प्रतिकर राशि
अदालत ने पीड़िता को कुल 2 लाख रुपये की प्रतिकर राशि देने का आदेश दिया है। इसमें दोषियों से वसूल किए गए जुर्माने में से 1 लाख रुपये पीड़िता के बैंक खाते में दिए जाएंगे। वहीं राज्य सरकार की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चंपावत के माध्यम से 1 लाख रुपये की अतिरिक्त प्रतिकर राशि दी जाएगी।
अदालत के इस फैसले को अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला के साथ हुए अपमानजनक व्यवहार के मामले में सख्त न्यायिक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।