वन विकास निगम पर कर्मचारियों का बड़ा आरोप, भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के खिलाफ चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

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देहरादून: उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संघ ने निगम प्रबंधन पर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं, कर्मचारी उत्पीड़न और तानाशाही रवैये के गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारी संघ ने दावा किया कि वर्ष 2019 से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को आज तक उनके वैधानिक देयकों का भुगतान नहीं किया गया है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कर्मचारी आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों के 150 करोड़ रुपये के देय अटके

कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष त्रिलोक सिंह बिष्ट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वर्ष 2019 से अब तक सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों ने 35 से 40 वर्षों तक निगम की सेवा की, लेकिन उन्हें बिना देयकों के घर भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद निगम प्रबंधन भुगतान को लगातार टालता रहा है।

अनावश्यक कार्यक्रमों पर करोड़ों खर्च करने का आरोप

संघ का आरोप है कि एक ओर कर्मचारियों के करीब 150 करोड़ रुपये के देयकों का भुगतान लंबित है, वहीं दूसरी ओर निगम “व्यवहार से व्यापार” सेमिनार, रजत जयंती समारोह और मुख्यालय की साज-सज्जा जैसे कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि निगम लाभांश दिखाकर अपनी उपलब्धियां गिना रहा है, जबकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिल रहा।

डिपो की सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

कर्मचारी संघ ने वन विकास निगम के प्रकोष्ठ भंडारण डिपो की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि कई डिपो में न तो तारबाड़ की व्यवस्था है और न ही रात में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके बावजूद डिपो के आधुनिकीकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने की योजना बनाई जा रही है।

एमडी पर संवाद न करने का आरोप

संघ ने आरोप लगाया कि प्रबंध निदेशक ने पदभार संभालने के बाद से कर्मचारियों और कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों से कोई वार्ता नहीं की। उनका कहना है कि कर्मचारी संघ द्वारा कथित घोटालों को उजागर किए जाने के कारण पिछले सात महीनों से एमडी ने उनसे मिलने तक की आवश्यकता नहीं समझी।

चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया कि यदि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित भुगतान, कथित वित्तीय अनियमितताओं और अन्य शिकायतों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वन विकास निगम के कर्मचारी आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

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