बीकेटीसी की बजट बैठक में बड़ा फैसला: बदरीनाथ और केदारनाथ में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव

देहरादून : उत्तराखंड में बदरीनाथ‑केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की बजट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। मंगलवार को देहरादून स्थित केनाल रोड कार्यालय में आयोजित बैठक में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके साथ ही आगामी यात्रा सत्र 2026-27 के लिए 121 करोड़ 7 लाख रुपये से अधिक का बजट भी मंजूर किया गया।

बैठक की अध्यक्षता बीकेटीसी अध्यक्ष Hemant Dwivedi ने की। बैठक में चारधाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न व्यवस्थाओं और विकास कार्यों पर चर्चा की गई।

बजट में बदरीनाथ और केदारनाथ के लिए अलग-अलग प्रावधान

बैठक में पेश बजट के अनुसार श्री बदरीनाथ धाम के लिए 57 करोड़ रुपये और केदारनाथ धाम के लिए 63 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। समिति के मुख्य कार्याधिकारी Vijay Prasad Thapliyal ने बैठक का संचालन किया और वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया।

उन्होंने पिछली बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की जानकारी भी सदस्यों को दी।

अप्रैल में शुरू होगी चारधाम यात्रा

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि आगामी चारधाम यात्रा अप्रैल माह से शुरू होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार श्री केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खोले जाएंगे, जबकि बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे।

वहीं गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के अवसर पर 19 अप्रैल को खोले जाएंगे।

बदरीनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्य

बीकेटीसी अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विजन और मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के दिशा-निर्देश में केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं। इसके बाद अब बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण के कार्य तेजी से चल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार और मंदिर समिति का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सरल और सुगम दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

यात्रा से पहले सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश

बीकेटीसी अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली जाएं। बजट में यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए आवश्यक प्रावधान किए गए हैं।

समिति के पदाधिकारियों का मानना है कि इन प्रस्तावों के प्रभावी क्रियान्वयन से आगामी यात्रा वर्ष 2026-27 में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धामों की व्यवस्थाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी।

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