HC की टिप्पणी पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, दुष्कर्म के फैसले पर लगाई रोक

दिल्ली: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कुछ दिन पहले नाबालकी लड़की के साथ हुए दुष्कर्म पर फैसला जारी किया था जिसको सुप्रीम कोर्ट ने असंवेदनशील बताया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था नाबालिक लड़की का ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामा का नाडा तोड़ना रेप की कोशिश नहीं है। इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया है।

 

नाबालिक के साथ हुए दुष्कर्म से जुड़ा था मामला

हाई कोर्ट ने बताया कि नाबालिक लड़की को खींच कर पुलिया के नीचे लेजाया गया और उसके पायजामा का नाडा तोड़ गया था । जो कि रेप की कोशिश नहीं कहलाया जाएगा। ये घटना 11 वर्ष की नाबालिक लड़की के साथ हुआ जिस पर जस्टिस राम मनोहर नारायण निष्कर्ष का कहना है कि ये मामला महिला की गरिमा का आहात का मामला है। इसे रेप या रेप की कोशिश नहीं कह सकते।

 

सुप्रीम कोर्ट ने जजों के फैसले को बताया असंवेदनशील 

हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जजों का फैसला असंवेदनशील और अमानवीय है। हमें यह देख कर बहुत दुख हो रहा की फैसला लिखने वालों में संवेदनशीलता नहीं है।

सुनवाई में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ फैसले ऐसे होते हे जिन पर रोक लगाना जरूरी होता है। फैसले के पैराग्राफ 21,24 और 26 मैं जो बातें लिखी गई हैं उनसे लोगों में गलत संदेश जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट इस फैसले पर रोक लगा कर सभी पक्षों को नोटिस जारी कर रही है।

 

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