मसूरी में SDM कार्यालय परिसर पर टूटा पहाड़, सरकारी आवास में घुसी चट्टान; कर्मचारी का परिवार बाल-बाल बचा

मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी में लगातार हो रही बारिश के बीच बुधवार सुबह बड़ा हादसा होते-होते टल गया। एसडीएम कार्यालय परिसर स्थित सरकारी आवासों पर अचानक पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिर पड़ा। भारी चट्टान एक सरकारी आवास की पत्थर की दीवार तोड़ते हुए कमरे के अंदर जा घुसी। घटना के समय कर्मचारी गोविंद सिंह नेगी, उनकी पत्नी और छोटा बच्चा घर में मौजूद थे। गनीमत रही कि परिवार सुरक्षित बच गया, हालांकि उनकी पत्नी को मामूली चोटें आई हैं।

 

गोविंद सिंह नेगी ने बताया कि सुबह तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। इससे पहले कि परिवार कुछ समझ पाता, पहाड़ से टूटी विशाल चट्टान दीवार तोड़कर कमरे में आ गई। उन्होंने बताया कि जहां चट्टान गिरी, वहां से कुछ ही दूरी पर उनका बिस्तर था। यदि दीवार पत्थर की बजाय ईंट की होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।

 

हर बरसात में बना रहता है खतरा

 

गोविंद सिंह ने बताया कि एसडीएम कार्यालय परिसर के इन पुराने सरकारी आवासों में करीब पांच परिवार रहते हैं। बरसात के दौरान पहाड़ी से छोटे-बड़े पत्थर गिरना आम बात है, लेकिन इस बार पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटने से कर्मचारियों और उनके परिवारों में दहशत का माहौल है। उनका कहना है कि हर बारिश में जान जोखिम में डालकर रहना पड़ता है।

 

अंग्रेजों के समय के हैं सरकारी आवास

 

स्थानीय कर्मचारियों के अनुसार, ये सरकारी आवास अंग्रेजों के समय के बने हुए हैं और अब काफी जर्जर हो चुके हैं। लंबे समय से इनके पुनर्निर्माण और पहाड़ी के वैज्ञानिक ट्रीटमेंट की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कर्मचारियों का कहना है कि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।

 

प्रशासन ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

 

घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम मसूरी राहुल आनंद को अवगत कराया गया। गोविंद सिंह ने बताया कि एसडीएम ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जल्द ही क्षतिग्रस्त भवन व पहाड़ी का तकनीकी निरीक्षण कराया जाएगा।

 

सुरक्षित आवास की उठी मांग

 

हादसे के बाद कर्मचारियों ने जर्जर सरकारी आवासों के पुनर्निर्माण, पहाड़ी के वैज्ञानिक ट्रीटमेंट और सुरक्षित स्थान पर वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि स्थायी समाधान होने तक इन भवनों में रहना बेहद जोखिम भरा है।

 

लगातार हो रही बारिश के बीच हुई इस घटना ने संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित पुराने सरकारी भवनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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