प्रयागराज महाकुंभ में सबसे खूबसूरत साध्वी के रूप में मशहूर हुईं हर्षा रिछारिया बाबा केदार के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर पहुंची. जहां हर्षा ने महाशिवरात्रि के मौके पर बाबा केदार का आशीर्वाद लिया. इसके साथ ही केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि कार्यक्रम में भी भाग लिया. वहीं, हर्षा रिछारिया ने कहा कि उनका मकसद सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करना है. वो कोई साध्वी नहीं हैं, बल्कि अपने मठ-मंदिरों की रक्षा को लेकर कार्य कर रही हैं. सनातन धर्म के लिए उन्हें जो भी कदम उठाने पड़ेंगे, वे इसके लिए पीछे नहीं रहेंगी.
दरअसल, निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज की शिष्या हर्षा रिछारिया ऊखीमठ स्थित बाबा केदार के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर पहुंची. जहां हर्षा ने मंदिर में पूजा-अर्चना की. ईटीवी भारत से बातचीत में हर्षा रिछारिया ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में उन्हें बेवजह ट्रोल किया गया. वे अपने सनातन धर्म को लेकर कार्य कर रही हैं. उनका मकसद अपने मठ-मंदिरों की रक्षा को लेकर कार्य करना है. कुछ लोग बेवजह बात का बतंगड़ बना देते हैं, जिससे उन्हें कभी भी डर नहीं लगा.
सनातन धर्म की आवाज उठाने वाले कभी भी इन बातों से घबराते नहीं हैं. हर्षा ने कहा कि अन्य समुदाय के लोग हमारे धर्म को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जब उन्हें प्रयागराज महाकुंभ में ट्रोल किया गया तो दूसरे समुदाय के लोगों ने सवाल किया कि तुम्हारे ही समाज के लोग ही तुम पर उंगलियां उठा रहे हैं. मुझे धर्म बदलने तक की बात कही गई. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा करना ही उनका उद्देश्य है. गौ-गंगा की रक्षा को लेकर कार्य किया जा रहा है.
इसके साथ ही हर्षा ने कहा कि केदारघाटी में मांस और मदिरा का सेवन नहीं होना चाहिए. ये केदार भूमि है, जहां स्वयं भगवान शंकर ही मनुष्य के कर्म का हिसाब-किताब रखते हैं. उन्होंने कहा कि साल दर साल केदारनाथ यात्रा परवान चढ़ रही है. ऐसे में यहां व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाना चाहिए. साथ ही जो लोग यहां पर मांस-मदिरा का सेवन करते हुए उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जरूरत है. धर्म स्थलों में इस प्रकार के घटनाक्रम श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने का कार्य करते हैं.