जानिए छठ पूजा क्यों मनाई जाती है, इसकी क्या मान्यताएं हैं और किस तरह इसका व्रत किया जाता है

पाखी शांडिल्य

Chhath Puja: छठ पूजा भारत का एक बहुत ही प्रसिद्ध और प्रमुख त्यौहार है। जो 25 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। ये त्यौहार खासतौर पर बिहार, झारखण, पुरवइया उत्तरप्रदेश, नेपाल और ऐसे बहुत से क्षेत्रों में भक्ति के साथ मनाया जाता है।

यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है। छठी मैया जो सूर्य देव की बहन मानी जाती है, उनसे लोग सुख शांति और संतान की रक्षा और परिवार की भलाई की कमाना करते हैं।

छठ पूजा के शुरुआत और विधि विधान

ये छठ पूजा चार दिनों तक चलती है। ये कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक मनाई जाती है।

छठ पूजा में चार दिन मुख्य अनुष्ठान किए जाते हैं, इसमें पहले दिन नहाय-खाय, यानी इस दिन व्रती शुद्ध होकर स्नान करते है, घर को साफ किया जाता है और इस दिन खाने में कद्दू की सब्जी बनाई जाती है।दूसरा दिन यानि खरना, जहां सूर्यास्त के बाद व्रती गुड़ की खीर, रोटी और केले का प्रसाद बनती है इसे खाकर अगले छत्तीस घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है।
तो वहीं संध्या अर्घ्य यानी तीसरा दिन, इस दिन व्रती और परिवार जन नदी या तलब के किनारे जाकर अस्त होते सूर्य को प्रसाद अर्पित करते हैं। ओर आखरी दिन,ऊषा अर्घ्य, यह पूजा का चौथा और आखिरी दिन होता है। इस दिन सभी व्रती और भक्त नदी में डूबकी लगाते हुए उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं. इसके बाद व्रत खोला जाता है और प्रसाद बांटा जाता है।

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