कांवड़ियों से नशा और हिंसा से दूर रहने की अपील, भगवा पहनकर विरोध पर भी साधा निशाना

हरिद्वार: पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिन मंगलवार को ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। योगगुरु स्वामी रामदेव सहित हजारों लोगों ने आचार्य बालकृष्ण को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

 

मीडिया से बातचीत के दौरान स्वामी रामदेव ने आयुर्वेद को सभी चिकित्सा पद्धतियों में सर्वोत्तम बताते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कांवड़ यात्रा पर निकले शिवभक्तों से नियमों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से यात्रा पूरी करने की अपील की।

 

कांवड़ियों से नशा और हिंसा से दूर रहने की अपील

 

स्वामी रामदेव ने कहा कि कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति आस्था और साधना का पर्व है। उन्होंने श्रद्धालुओं से गंगाजल लेकर श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का जलाभिषेक करने का आग्रह करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का नशा, हिंसा या तोड़फोड़ शिवभक्ति के विपरीत है।

 

उन्होंने कहा कि भगवान शिव स्वयं किसी प्रकार का नशा नहीं करते थे। भांग, धतूरा और अन्य सामग्री श्रद्धा के प्रतीक स्वरूप अर्पित की जाती रही है, जिसे गलत रूप में नहीं समझना चाहिए। उन्होंने शिवभक्तों से सच्चे शिवत्व को अपनाने और संयम व अनुशासन के साथ यात्रा पूरी करने का आह्वान किया।

 

भगवा पहनकर विरोध पर जताई आपत्ति

 

संसद परिसर में सांसद पप्पू यादव द्वारा भगवा वस्त्र पहनकर किए गए विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि किसी भी धर्म या पंथ के प्रतीकों का राजनीतिक विरोध के लिए उपयोग करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवा सनातन संस्कृति का प्रतीक है और उसका अपमान धार्मिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक दृष्टि से अनुचित है।

 

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी धर्म, संत, पुजारी या धार्मिक प्रतीक का अपमान संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। राजनीतिक मुद्दों को धर्म से जोड़ने के बजाय तथ्यों और मुद्दों के आधार पर उठाया जाना चाहिए।

 

आयुर्वेद को बताया श्रेष्ठ चिकित्सा पद्धति

 

स्वामी रामदेव ने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का आधार है। उन्होंने लोगों से प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने और औषधीय पौधों के संरक्षण का भी आह्वान किया।

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