मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी में अवैध निर्माण के खिलाफ नगर पालिका परिषद और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मासौनिक लॉज डिमरी निवास के पास स्थित एक बहुमंजिला भवन के करीब 40 से 50 फ्लैटों को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान फ्लैट मालिकों ने विरोध जताया और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

बिना मानचित्र और फायर एनओसी के बना बहुमंजिला भवन
जानकारी के अनुसार भवन का निर्माण तत्कालीन नगर पालिका बोर्ड के कार्यकाल में किया गया था। आरोप है कि निर्माण के लिए न तो एमडीडीए से स्वीकृत मानचित्र लिया गया और न ही अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त किया गया। इसके बावजूद छह मंजिला इमारत में दर्जनों फ्लैट बनाकर लोगों को आवंटित कर दिया गया।
2023 में भी सील हुआ था भवन
यह भवन वर्ष 2023 में भी जिला प्रशासन और एमडीडीए द्वारा सील किया गया था। आरोप है कि बाद में सील तोड़कर दोबारा फ्लैटों में लोगों को रहने दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सील तोड़ी गई थी तो संबंधित विभागों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की, यह बड़ा सवाल है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद दोबारा कार्रवाई
मामले को लेकर समाजसेवियों द्वारा दायर जनहित याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भवन की यथास्थिति बनाए रखने और फ्लैटों के आवंटन पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके भवन में लोगों के रहने की शिकायतें सामने आने पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया। इसके बाद एमडीडीए और नगर पालिका ने सोमवार को न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में दोबारा कार्रवाई करते हुए फ्लैटों को सील कर दिया।
फ्लैट मालिकों ने जताई नाराजगी
कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में फ्लैट स्वामी मौके पर पहुंचे। उनका कहना था कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर फ्लैट खरीदे हैं। यदि भवन अवैध था तो निर्माण के समय ही कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अब वर्षों बाद उन्हें घर खाली करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माणकर्ताओं पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
जवाबदेही तय करने की उठी मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मसूरी में अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर बहस तेज हो गई है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि केवल फ्लैट सील करने के बजाय यह भी तय किया जाए कि बिना स्वीकृत मानचित्र, बिना फायर एनओसी और न्यायालय के आदेशों के बावजूद भवन कैसे तैयार हुआ, वर्ष 2023 में लगी सील कैसे टूटी और इतने लंबे समय तक प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की।