SIR से पहले बड़ा खुलासा, देहरादून समेत मैदानी जिलों में हजारों मतदाता ‘लापता’

देहरादून: उत्तराखंड में अप्रैल में प्रस्तावित फाइनल स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से पहले आई प्री-एसआईआर रिपोर्ट ने निर्वाचन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, Dehradun, Udham Singh Nagar और Nainital जैसे मैदानी जिलों में बड़ी संख्या में मतदाता अपने पते पर ‘लापता’ पाए गए हैं।

सबसे गंभीर स्थिति राजधानी देहरादून की धर्मपुर विधानसभा सीट पर सामने आई है, जहां करीब 50 प्रतिशत मतदाता बीएलओ को अपने पते पर नहीं मिले। इसी तरह रायपुर में लगभग 40 प्रतिशत और डोईवाला में करीब 35 प्रतिशत मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो सका है। इन आंकड़ों ने निर्वाचन विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, तेजी से विकसित हो रही नई कॉलोनियों और आवासीय सोसाइटियों में मतदाताओं के डेटा को पोर्टल पर मैप करने की प्रक्रिया धीमी रही है। इसके साथ ही बाहरी राज्यों से आए लोगों के स्थायी और अस्थायी पते के सत्यापन में भी बीएलओ को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2003 के बाद इन मैदानी क्षेत्रों में तेजी से प्रवासी आबादी बढ़ी है। उत्तर प्रदेश और बिहार समेत अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में लोग यहां बस गए हैं, जिससे डोर-टू-डोर सत्यापन की प्रक्रिया जटिल हो गई है। कई मामलों में ऐसे मतदाताओं की अपने मूल राज्यों में भी मैपिंग हो चुकी है, जिससे डेटा मिलान और कठिन हो गया है।

जहां एक ओर मैदानी जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, वहीं पहाड़ी जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। Rudraprayag और Bageshwar में 100 प्रतिशत सत्यापन दर्ज किया गया है। इसके अलावा चंपावत और उत्तरकाशी 99 प्रतिशत, अल्मोड़ा 97 प्रतिशत, पिथौरागढ़, टिहरी और चमोली 95 प्रतिशत तथा पौड़ी 93 प्रतिशत सत्यापन के साथ आगे हैं।

निर्वाचन विभाग अब इस स्थिति से निपटने के लिए प्रयास तेज कर रहा है, ताकि अप्रैल तक सभी मतदाता सूचियों को अपडेट किया जा सके और SIR प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा किया जा सके।

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