नैनीताल: 12वीं पास मेधावी बालिकाओं को नंदा-गौरा योजना के तहत वित्तीय लाभ नहीं मिलने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कड़े सवाल किए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि पात्र बालिकाओं को अब तक योजना का लाभ क्यों नहीं दिया गया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकार के पास योजना संचालित करने के लिए बजट नहीं है तो ऐसी योजनाओं को बंद कर देना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि योजना से जुड़ा मामला फिलहाल वित्त विभाग के पास विचाराधीन है और जल्द ही आवश्यक बजट जारी किया जाएगा। वहीं याची की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि बजट जारी होने में हो रही देरी का सीधा असर गरीब परिवारों की बालिकाओं की उच्च शिक्षा पर पड़ रहा है। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि योजना के तहत सभी पात्र छात्राओं को बिना देरी लाभ दिया जाए।
यह मामला चमोली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता ममता नेगी की जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में बताया गया कि चमोली जिले में वर्ष 2022-23 में इंटरमीडिएट परीक्षा पास करने वाली 439 बालिकाओं ने वर्ष 2023 में ही विद्यालयों के माध्यम से योजना के लिए जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे।
नंदा-गौरा योजना के तहत प्रत्येक पात्र बालिका को आगे की पढ़ाई के लिए 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जानी है। संबंधित विभाग ने इन छात्राओं को योजना का लाभ देने के लिए सरकार से करीब 2.45 करोड़ रुपये के बजट की मांग की थी, लेकिन लंबे समय बाद भी बजट स्वीकृत नहीं हुआ।
इस वजह से पात्र छात्राएं अब तक योजना के वित्तीय लाभ से वंचित हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग को मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।