हरिद्वार: हरिद्वार में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर बुलाई गई अहम बैठक अखाड़ा परिषद की अंदरूनी गुटबाजी की भेंट चढ़ गई। शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की जगह (यदि स्रोतानुसार) शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा की अध्यक्षता में मेला नियंत्रण भवन में आयोजित बैठक का जूना, निरंजनी, आह्वान, अग्नि और आनंद अखाड़े समेत पांच प्रमुख संन्यासी अखाड़ों ने बहिष्कार कर दिया। बैठक में केवल आठ अखाड़ों के संत ही शामिल हुए।
बैठक से दूर रहे पांच प्रमुख अखाड़े
दोपहर तीन बजे शुरू हुई बैठक में महानिर्वाणी, निर्मोही, निर्वाणी, पंच दिगंबर, निर्मल, नया उदासीन, बड़ा उदासीन और अटल अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। ये वही आठ अखाड़े हैं जिन्होंने हाल ही में कनखल में बैठक कर अखाड़ा परिषद की नई कार्यकारिणी का गठन किया था। दूसरी ओर जूना, निरंजनी, अग्नि, आह्वान और आनंद अखाड़ों ने बैठक से दूरी बनाए रखी। बैठक शुरू होने के कुछ देर बाद आह्वान अखाड़े के महामंत्री महंत सत्य गिरी महाराज भी एक फोन आने के बाद सभागार से बाहर चले गए।
प्रशासन पर पक्षपात का आरोप
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने मेला प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि निर्धारित समय पर अधिकारियों को दूसरे गुट के भंडारे में नहीं जाना चाहिए था। उन्होंने नई अखाड़ा परिषद को अवैध बताते हुए दावा किया कि जूना और निरंजनी जैसे बड़े संन्यासी अखाड़ों को बहुमत के साथ अन्य अखाड़ों का भी समर्थन प्राप्त है। हालांकि उन्होंने मेलाधिकारी सोनिका की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि वह कुंभ की तैयारियों को गंभीरता से आगे बढ़ा रही हैं।
नई कार्यकारिणी को लेकर भी मतभेद
महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि बैठक में कुंभ मेले की तैयारियों और बैरागी अखाड़ों के लिए भूमि आवंटन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने दावा किया कि साधु-संतों में कोई मतभेद नहीं है और अगली बैठक में सभी अखाड़ों की भागीदारी होगी।
वहीं आह्वान अखाड़े के महामंत्री महंत सत्य गिरी महाराज ने कहा कि वर्तमान में कोई वैध अखाड़ा परिषद अस्तित्व में नहीं है। उनके अनुसार 13 अखाड़ों की सहमति से ही परिषद की कार्यकारिणी का गठन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब जूना और अग्नि अखाड़े के प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुए तो उन्होंने भी बैठक का बहिष्कार किया।
निर्मोही अखाड़े ने नई कार्यकारिणी का किया बचाव
निर्मोही अखाड़े के श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि आठ अखाड़ों की सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है और सभी आठ अखाड़ों के प्रतिनिधि कुंभ बैठक में मौजूद रहे। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हरिद्वार कुंभ 2027 का आयोजन भव्य और ऐतिहासिक होगा।