मसूरी में स्कूल की जमीन पर बनी मजार को लेकर विवाद, वन विभाग ने भेजा नोटिस

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मसूरी | मसूरी के वाइनबर्ग एलन स्कूल बोर्डिंग स्कूल की जमीन पर जंगल के बीच बनी एक मजार को लेकर विरोध शुरू हो गया है। निर्माण पर रोक के बावजूद कथित रूप से हुए इस निर्माण को लेकर वन विभाग ने गुरुवार को स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। नोटिस में जमीन से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ मजार के निर्माण से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई है।

जंगल के बीच बनी मजार पर उठे सवाल

जानकारी के अनुसार, मसूरी के टिहरी बाईपास रोड स्थित वाइनबर्ग एलन स्कूल के कैंपस में जंगल के बीच यह मजार बनी हुई है। मजार के आसपास सड़क समेत अन्य पक्के निर्माण भी किए गए हैं। बुधवार को कुछ स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर इसका विरोध किया और आरोप लगाया कि जंगल की जमीन पर कब्जा कर मजार का निर्माण किया गया है।
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच में सामने आया कि जिस जमीन पर मजार बनी है, वह प्राइवेट फॉरेस्ट की श्रेणी में आती है और वाइनबर्ग एलन स्कूल के स्वामित्व में है।

वन विभाग ने स्कूल से मांगा जवाब

डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि मजार स्कूल की जमीन पर स्थित है। इस संबंध में स्कूल को नोटिस भेजा गया है, जिसमें जमीन के मालिकाना हक, मजार के निर्माण का समय और यह किसके द्वारा बनाई गई, इसकी जानकारी मांगी गई है।

स्कूल प्रबंधन का पक्ष

वाइनबर्ग एलन स्कूल के बरसर ए.एन. चौहान ने बताया कि मजार स्कूल की स्थापना से पहले से वहां मौजूद है। इसके निर्माण या संचालन में स्कूल की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि मजार स्कूल की जमीन पर जरूर है, लेकिन इसे हटवाने की कई बार कोशिश की गई, जो सफल नहीं हो पाई। स्कूल को मजार हटाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।

1980 से मसूरी में निर्माण पर रोक

गौरतलब है कि मसूरी में वर्ष 1980 से निर्माण पर प्रतिबंध लगा हुआ है। ऐसे में यदि मजार का निर्माण इसके बाद हुआ पाया जाता है, तो इसे अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि मजार उनकी जमीन पर जरूर है, लेकिन इसका निर्माण स्कूल ने नहीं कराया।

लिखित जवाब में स्कूल का दावा

वन विभाग को दिए गए लिखित जवाब में स्कूल की ओर से कहा गया है कि यह मजार उनकी निजी भूमि पर करीब 50 वर्षों से मौजूद है और यह सभी वर्ग, धर्म और जाति के लोगों की आस्था से जुड़ी हुई है।
अब इस मामले में आगे की कार्रवाई क्या होगी, इसका निर्णय वन विभाग की जांच रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किया जाएगा।

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