देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों के बंद होने और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ के तहत पार्टी ने दावा किया है कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के 826 प्राथमिक सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। इस मामले में CJP ने सरकार को 10 दिन का समय देते हुए स्पष्ट रिपोर्ट जारी करने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर 2 अक्टूबर के बाद शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
CJP के नॉर्थ जोन कोऑर्डिनेटर श्रेष्ठ सिंह ने रविवार को उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकारी स्कूलों के बंद होने का मामला सामने आ रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों के पद खाली हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदेश के 270 स्कूलों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
श्रेष्ठ सिंह ने कहा कि पहाड़ी जिलों के कई सरकारी स्कूलों में बच्चों को पर्याप्त शिक्षक और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने सरकारी और निजी विद्यालयों के बीच सुविधाओं के अंतर को लेकर भी सवाल उठाए।
CJP ने सरकार से बंद किए गए 826 स्कूलों को लेकर पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। इसमें स्कूलवार छात्र संख्या, शिक्षकों की संख्या, उपलब्ध सुविधाएं, स्कूल बंद किए जाने का कारण, स्कूल के आसपास की आबादी और निकटतम वैकल्पिक स्कूल की दूरी जैसी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा संगठन ने 10 दिनों के भीतर उत्तराखंड एजुकेशन रोड मैप जारी करने की मांग की है। CJP के अनुसार, इसमें शिक्षकों की उपलब्धता, पेयजल, शौचालय, सुरक्षित भवन, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर जिलावार समयसीमा तय की जानी चाहिए।
संगठन ने पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए बुनियादी परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग की है। इसमें सुरक्षित स्कूल बस, मिनी बस या अन्य नियमित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
श्रेष्ठ सिंह ने कहा कि यदि सरकार 10 दिन के भीतर बंद हुए स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जवाब या रोडमैप जारी नहीं करती है तो शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग भी उठाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद उत्तराखंडभर में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में विधानसभा में बताया गया था कि उत्तराखंड में पिछले पांच वर्षों में 826 सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद किए गए हैं। सरकारी आंकड़ों में स्कूलों के बंद होने का प्रमुख कारण शून्य छात्र नामांकन बताया गया था।