उत्तरकाशी: गोविंद वन्यजीव विहार क्षेत्र के 65 गांवों के हजारों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। करीब सात वर्षों से भूमि विवाद के कारण बंद पड़ा गैचवानगांव (नैटवाड़) विद्युत सब स्टेशन अब जल्द ही चालू होने जा रहा है। उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच (सीजीआरएफ) के सख्त निर्देश और विद्युत लोकपाल द्वारा आदेश को बरकरार रखने के बाद बिजली विभाग ने भूमि विवाद का समाधान कर सब स्टेशन की टेस्टिंग शुरू कर दी है।
वर्तमान में मोरी विकासखंड के करीब 65 गांवों को मोरी विद्युत सब स्टेशन से लगभग 150 किलोमीटर लंबे फीडर के माध्यम से बिजली आपूर्ति की जाती है। लंबी लाइन होने के कारण बरसात, भूस्खलन और तकनीकी खराबी के दौरान पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। दूरस्थ इलाकों में फॉल्ट का पता लगाने और उसे ठीक करने में कई-कई दिन लग जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को लंबे समय तक बिजली संकट झेलना पड़ता है। इसके अलावा क्षेत्र में लो वोल्टेज की समस्या भी लंबे समय से बनी हुई है।
क्षेत्र की बिजली समस्याओं को लेकर उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच ने जखोल गांव में विशेष शिविर आयोजित कर ग्रामीणों की शिकायतें सुनी थीं। सुनवाई के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता गंगा सिंह रावत समेत कई ग्रामीणों ने वर्षों से बंद पड़े गैचवानगांव सब स्टेशन को शीघ्र चालू कराने की मांग उठाई। मंच ने स्पष्ट किया कि भूमि विवाद का खामियाजा उपभोक्ताओं को नहीं भुगतना चाहिए और विभाग की जिम्मेदारी है कि वह गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध बिजली उपलब्ध कराए।
बिजली विभाग ने सीजीआरएफ के आदेश को विद्युत लोकपाल के समक्ष चुनौती दी थी, लेकिन लोकपाल ने भी मंच के आदेश को सही ठहराते हुए विभाग को जल्द समाधान निकालने के निर्देश दिए। इसके बाद विभाग ने भूमि विवाद का निस्तारण कर सब स्टेशन को चालू करने की प्रक्रिया तेज कर दी।
एसडीओ पुरोला रोबिन सिंह ने बताया कि गैचवानगांव स्थित सब स्टेशन का भूमि विवाद समाप्त हो चुका है और वर्तमान में मशीनों व उपकरणों की टेस्टिंग की जा रही है। टेस्टिंग पूरी होते ही 65 गांवों को इसी सब स्टेशन से बिजली आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। इससे फॉल्ट आने की स्थिति में स्थानीय स्तर पर ही बिजली बहाल की जा सकेगी और लो वोल्टेज की समस्या से भी काफी हद तक राहत मिलेगी।
करीब एक दशक से बंद पड़े इस करोड़ों रुपये की लागत वाले सब स्टेशन के शुरू होने से न केवल क्षेत्र के हजारों उपभोक्ताओं को बेहतर और नियमित बिजली मिलेगी, बल्कि लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी सरकारी परिसंपत्ति का भी प्रभावी उपयोग हो सकेगा।