देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) का दायरा बढ़ाते हुए इसमें टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज की स्क्रीनिंग को भी शामिल कर लिया है। इस पहल के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले करीब पांच लाख बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जाएगी। डायबिटीज की पुष्टि होने पर बच्चों को नि:शुल्क उपचार और आवश्यकता पड़ने पर इंसुलिन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पहले से ही 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर जन्मजात दोष, बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों और विकलांगता की पहचान कर उनका नि:शुल्क उपचार किया जाता है। अब इस कार्यक्रम में मधुमेह की स्क्रीनिंग को भी शामिल कर बच्चों में समय रहते बीमारी की पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।
इस अभियान के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल हेल्थ टीमें सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों की जांच करेंगी। प्रत्येक टीम में दो आयुष चिकित्सक, एक एएनएम या स्टाफ नर्स तथा एक फार्मासिस्ट शामिल होगा।
स्क्रीनिंग के दौरान विशेष रूप से उन बच्चों पर फोकस किया जाएगा, जिनमें मोटापा या अधिक वजन, शारीरिक निष्क्रियता, जंक फूड का अधिक सेवन, परिवार में डायबिटीज का इतिहास, गर्भावस्था के दौरान मां को डायबिटीज, पीसीओएस, फैटी लिवर या हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियां मौजूद हैं।
जांच के दौरान संदिग्ध पाए जाने वाले बच्चों को जिला अस्पतालों के गैर-संचारी रोग (एनसीडी) क्लीनिक में भेजा जाएगा। यहां फास्टिंग ब्लड शुगर, भोजन के दो घंटे बाद ब्लड शुगर और एचबीए1सी (HbA1c) जांच के आधार पर डायबिटीज की पुष्टि की जाएगी। यदि किसी बच्चे में टाइप-1 डायबिटीज की पुष्टि होती है तो उसका तत्काल इंसुलिन उपचार शुरू किया जाएगा। वहीं, टाइप-2 डायबिटीज और प्री-डायबिटीज की भी स्क्रीनिंग और उपचार की व्यवस्था रहेगी।
प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की भी बड़े स्तर पर डायबिटीज स्क्रीनिंग कर रहा है। विभाग ने 39,85,960 लोगों को लक्ष्य आबादी में शामिल किया है, जिनमें से अब तक करीब 34 लाख लोगों की स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुमान के अनुसार लक्ष्य आबादी के लगभग 7.7 प्रतिशत लोग टाइप-2 डायबिटीज से प्रभावित हो सकते हैं। इस आधार पर प्रदेश में लगभग 3.06 लाख संभावित मरीज होने का अनुमान है, जबकि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से करीब सवा लाख मरीजों का उपचार किया जा रहा है।