उत्तराखंड: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल Bhagat Singh Koshyari को 25 मई को पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले विशेष समारोह में राष्ट्रपति Droupadi Murmu उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी। इस खबर से उत्तराखंड में खुशी का माहौल है और इसे राज्य के लिए गर्व का क्षण माना जा रहा है।
17 जून 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के पलानधुरा गांव में जन्मे भगत सिंह कोश्यारी ने साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से वर्ष 1964 में अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के कासगंज स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षक के रूप में कार्य किया, जहां बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कारों की शिक्षा दी। इसके बाद वर्ष 1966 में पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना कर सीमांत क्षेत्रों में शिक्षा को मजबूत करने का कार्य किया।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत के बाद वर्ष 1997 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य बनाया गया। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वे राज्य की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और बाद में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली।
इसके अलावा वे वर्ष 2008 में राज्यसभा सदस्य चुने गए और वर्ष 2014 में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा सीट से सांसद बने। 5 सितंबर 2019 को उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। अगस्त 2020 में उन्हें गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।
भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा के बाद राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक संगठनों ने खुशी जताई है। उत्तराखंड के लोगों ने इसे राज्य के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।