देहरादून: उत्तर प्रदेश में सक्रिय अवैध धर्मांतरण गिरोह ‘छांगुर बाबा’ का नेटवर्क अब उत्तराखंड तक पहुंच चुका है। यूपी एटीएस और देहरादून पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में देहरादून के शंकरपुर क्षेत्र से अब्दुल रहमान और डोईवाला निवासी मरियम नाम की महिला को हिरासत में लिया गया है। दोनों पर आरोप है कि वे लंबे समय से उत्तराखंड में धर्मांतरण की गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे और सीधे तौर पर ‘छांगुर बाबा’ उर्फ जलालुद्दीन के नेटवर्क से जुड़े हुए थे।

गुरुवार देर रात एटीएस ने शंकरपुर इलाके में छापा मारा और अब्दुल रहमान को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसके छांगुर बाबा गिरोह से जुड़े होने की पुष्टि हुई। इसके बाद डोईवाला में दबिश देकर मरियम नामक महिला को भी उठाया गया। दोनों से कई घंटे तक पूछताछ चली, जिसमें कई अहम दस्तावेज, मोबाइल डिवाइस और डिजिटल डेटा जब्त किया गया है। बताया जा रहा है कि अब्दुल रहमान वर्ष 2014-15 में खुद धर्म बदलकर मुस्लिम बना था और तभी से वह इस नेटवर्क से सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है।

छांगुर बाबा गिरोह के काम करने का तरीका भी उतना ही चौंकाने वाला है। गिरोह ने नेपाल और दुबई से मौलानाओं को बुलाकर देश में धर्मांतरण की ट्रेनिंग दी। इसके लिए पाकिस्तानी और तुर्की फंडिंग के जरिए हवाला चैनल का इस्तेमाल किया गया। गिरोह का मकसद सिर्फ धर्मांतरण नहीं, बल्कि नेपाल सीमा के पास आतंकी गतिविधियों के लिए कैंप बनाना भी था। हाल में यूपी में इसी गिरोह से जुड़े नीतू उर्फ नसरीन और छांगुर बाबा के भतीजे सबरोज की गिरफ्तारी के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।
देहरादून में पकड़े गए दोनों संदिग्धों की भूमिका राज्य में लोगों की पहचान करना, धर्म बदलने के लिए मानसिक रूप से तैयार करना और यूपी की नेटवर्क टीम से जोड़ना था। एटीएस का दावा है कि इन दोनों के जरिए गिरोह ने उत्तराखंड में भी पैर जमा लिए थे और आने वाले समय में कई युवाओं को टारगेट करने की योजना थी।
उत्तराखंड में लागू ‘फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट, 2018’ के तहत जबरन, लालच या छल से धर्म परिवर्तन कराना अपराध है, जिसमें 1 से 7 साल की सजा का प्रावधान है। अगर पीड़ित महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति से हो, तो सजा और अधिक सख्त हो सकती है।
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। एटीएस अब इनके संपर्कों, आर्थिक लेन-देन और अन्य गतिविधियों की गहराई से जांच कर रही है। साथ ही, गिरोह के नेपाल और अन्य सीमावर्ती इलाकों में फैलते नेटवर्क को लेकर खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।