देहरादून। उत्तराखंड में पशुओं के लिए उपयोग में लाए जाने वाले भूसे की कीमतों में भारी उछाल आने के बाद पशुपालन विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। विभाग ने भूसे के अनावश्यक भंडारण और राज्य से बाहर परिवहन पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। इस संबंध में पशुपालन विभाग के अपर सचिव संतोष बडोनी ने निर्देश जारी किए हैं।

उत्तराखंड में पशुपालकों द्वारा पशुओं के सूखे चारे के रूप में मुख्य रूप से गेहूं के भूसे का उपयोग किया जाता है। लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी और भूसे की कमी के कारण पशुपालकों को पर्याप्त मात्रा में भूसा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
हर वर्ष अप्रैल के दूसरे पक्ष और मई माह में गेहूं की फसल कटने के बाद भूसे की प्रचुर उपलब्धता रहती है। इसी दौरान पशुपालक और गौसदन अपनी आवश्यकता के अनुसार भूसे का संग्रह करते हैं। वहीं व्यापारियों द्वारा भी बड़ी मात्रा में भूसे के भंडारण की संभावना बनी रहती है।
पशुपालन विभाग के अनुसार भूसे की कमी की स्थिति में पशुस्वामियों द्वारा पशुओं को परित्यक्त किए जाने की आशंका बढ़ सकती है। इससे कृषि उपज को नुकसान, सड़क दुर्घटनाएं, यातायात बाधित होने और कानून व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
अपर सचिव संतोष बडोनी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि भूसे की बढ़ती कीमतों को देखते हुए अनावश्यक भंडारण और राज्य से बाहर परिवहन पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई की जाए।
आदेश के तहत ईंट भट्टों और अन्य उद्योगों में भूसे के उपयोग पर रोक लगाने तथा इन उद्योगों को आगामी 15 दिनों तक भूसा विक्रय नहीं किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही भूसा विक्रेताओं द्वारा किए जाने वाले अनावश्यक भंडारण और कालाबाजारी पर भी रोक लगाने को कहा गया है।
इसके अलावा जिलों में उत्पादित भूसे के राज्य से बाहर परिवहन पर तत्काल 15 दिनों के लिए रोक लगा दी गई है। वहीं पुराल जलाने पर भी तत्काल प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
अपर सचिव ने संबंधित अधिकारियों को इन सभी निर्देशों का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।