नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून जनपद के राजस्व विभाग के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में शामिल किए जाने से जुड़े मामले में सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने जिलाधिकारी देहरादून को याचिकाकर्ताओं के विकल्प पत्रों और प्रत्यावेदन पर दो माह के भीतर तर्कसंगत एवं स्पष्ट आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार, तिलक राम जोशी और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि वे वर्ष 1995-96 से राजस्व विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। याचिकाकर्ता संख्या एक वर्ष 2002 में नियमित हुए थे, जबकि याचिकाकर्ता संख्या दो और तीन एक अक्टूबर 2005 की कट-ऑफ तिथि के बाद नियमित हुए।
राज्य सरकार ने सात नवंबर 2023 को अधिसूचना संख्या 27057/2023 जारी कर कट-ऑफ तिथि के बाद नियुक्त या नियमित हुए सरकारी सेवकों से पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने के लिए एकमुश्त विकल्प मांगे थे। अधिसूचना के अनुपालन में याचिकाकर्ताओं ने अपने विकल्प पत्र उपजिलाधिकारी चकराता और कालसी को सौंपे थे। इन विकल्प पत्रों को 30 जनवरी 2024 को जिलाधिकारी देहरादून को अग्रसारित किया गया।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, लंबे समय तक उनके विकल्प पत्रों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद उन्होंने 27 मई 2026 को जिलाधिकारी देहरादून को प्रत्यावेदन दिया, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया और जिलाधिकारी को उनके विकल्प पत्रों पर कार्रवाई करते हुए एकमुश्त विकल्प को प्रभावी किए जाने के संबंध में निर्देश देने की मांग की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कहा कि यदि जिलाधिकारी को मामले में समयबद्ध निर्णय लेने के निर्देश दिए जाते हैं तो न्याय के हित पूरे हो जाएंगे। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
इसके बाद न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने याचिका का अंतिम रूप से निस्तारण करते हुए जिलाधिकारी देहरादून को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के 27 मई 2026 के प्रत्यावेदन पर हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तिथि से दो माह के भीतर तर्कसंगत एवं स्पष्ट आदेश पारित कर निर्णय लिया जाए।