नंदा देवी राजजात 2026 स्थगित, अब वर्ष 2027 में होगी ‘हिमालय महाकुंभ’

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कर्णप्रयाग | वर्ष 2026 के अगस्त–सितंबर में प्रस्तावित नंदा देवी राजजात इस साल नहीं होगी। 20 पड़ावों में करीब 280 किलोमीटर की इस ऐतिहासिक यात्रा को, जिसे ‘हिमालय का महाकुंभ’ कहा जाता है, अब वर्ष 2027 में आयोजित किया जाएगा। यह निर्णय उच्च हिमालयी क्षेत्रों में संभावित बर्फबारी और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

सितंबर में बर्फबारी की आशंका बनी वजह

नंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने कर्णप्रयाग में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि सितंबर माह में ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी की आशंका रहती है। इससे यात्रा संचालन में कठिनाइयां आ सकती हैं और यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। इन्हीं कारणों से राजजात-2026 को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि राजजात स्थगन की औपचारिक घोषणा 23 जनवरी को नौटी गांव में होने वाले मनौती कार्यक्रम के दौरान की जाएगी।

आयोजन टलने के पीछे मतभेद की भी चर्चा

सूत्रों के अनुसार, कुरूड़ और नौटी से नंदा देवी राजजात/नंदाजात के शुभारंभ को लेकर हाल में उत्पन्न हुए मतभेद भी आयोजन टलने का एक कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि समिति पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पूरी तरह श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता में रखकर लिया गया है।

क्या है नंदा देवी राजजात

नंदा देवी राजजात को देवी नंदा को उनके मायके से विदा करने का महापर्व माना जाता है। यह यात्रा चमोली जिले के नौटी गांव से शुरू होकर होमकुंड (रूपकुंड के निकट) में संपन्न होती है। करीब 19 से 22 दिन तक चलने वाली इस यात्रा में हजारों श्रद्धालु और साधु-संत शामिल होते हैं।

शासन को सौंपे गए अहम प्रस्ताव

पत्रकार वार्ता के दौरान नंदा देवी राजजात समिति ने शासन के समक्ष कई प्रस्ताव भी रखे। समिति ने मांग की कि हिमालय सचल महाकुंभ प्राधिकरण की तर्ज पर नंदा देवी राजजात प्राधिकरण का गठन किया जाए।
यह प्राधिकरण न केवल नंदा देवी राजजात, बल्कि नंदा लोकजात, वार्षिक यात्राओं और उत्तराखंड में नंदा देवी से जुड़े सभी मेलों की योजना और विकास कार्यों को देखे।

समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि नंदा देवी राजजात का पारंपरिक और धार्मिक दायित्व पूर्व की तरह गढ़वाल के राजवंशी कुंवरों के पास ही सुरक्षित रहेगा।
राजजात के स्थगन से जहां श्रद्धालुओं को इंतजार बढ़ गया है, वहीं समिति का कहना है कि 2027 में यात्रा को और अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा।

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