देहरादून: एमबीबीएस दाखिले के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह की जांच आगे बढ़ने के साथ उसका नेटवर्क भी बड़ा सामने आ रहा है। पुलिस की अब तक की पड़ताल में गिरोह का संचालन संगठित तरीके से किए जाने के संकेत मिले हैं। जांच में सामने आया है कि गिरोह में अलग-अलग सदस्यों की भूमिकाएं पहले से तय थीं।
पुलिस के अनुसार, गिरोह का एक हिस्सा एमबीबीएस में दाखिले के इच्छुक अभ्यर्थियों और उनके स्वजन की तलाश करता था। इसके बाद अभ्यर्थी की सामाजिक या आरक्षित श्रेणी के अनुरूप दस्तावेज जुटाने और कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने की व्यवस्था की जाती थी। वहीं, कुछ सदस्य दाखिले की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर सक्रिय रहते थे।
पहले तलाशे जाते थे ‘ग्राहक’, फिर तैयार होती थी योजना
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य ऐसे अभ्यर्थियों और उनके स्वजन से संपर्क करते थे, जो नीट में अपेक्षित परिणाम न आने या मनचाहे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिलने के कारण दाखिले का रास्ता तलाश रहे थे। उन्हें निर्धारित प्रक्रिया से अलग आसान तरीके से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने का भरोसा दिया जाता था।
अभ्यर्थी की जरूरत और श्रेणी की जानकारी लेने के बाद गिरोह के अन्य सदस्य सक्रिय होते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अभ्यर्थियों से संपर्क करने और उन्हें गिरोह तक लाने में किन लोगों की भूमिका थी।
श्रेणी का लाभ दिलाने के लिए दस्तावेजों का खेल
जांच में फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल का पहलू भी सामने आया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र कहां और किसके माध्यम से तैयार कराए जाते थे। दस्तावेजों के सत्यापन में सामने आई विसंगतियों को भी जांच का आधार बनाया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, यदि यह कड़ी पुष्ट होती है तो जांच अभ्यर्थियों से रकम लेने तक सीमित न रहकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल कराने वाले लोगों तक भी पहुंच सकती है।
दाखिले की ‘डील’ से कॉलेज तक पहुंचाने तक अलग-अलग जिम्मेदारी
गिरोह में कुछ सदस्यों की भूमिका अभ्यर्थियों और उनके स्वजन से कथित तौर पर सौदा तय करने की थी, जबकि अन्य सदस्य दाखिले की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर सक्रिय रहते थे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि रकम किस स्तर पर तय होती थी, किस माध्यम से ली जाती थी और बाद में किन-किन लोगों तक पहुंचती थी।
बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की पड़ताल इसी कड़ी में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल संपर्क, दस्तावेजों और संभावित पीड़ितों से जुड़ी जानकारी को जोड़कर नेटवर्क की अगली कड़ियां तलाश रही है।
विदेशों में मेडिकल दाखिले का भी दावा
पुलिस की जांच में गिरोह की पहुंच उत्तराखंड के बाहर होने के साथ ही विदेशों तक होने की बात भी सामने आई है। आरोपितों की ओर से मध्य एशिया के कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान में मेडिकल दाखिला दिलाने का दावा किए जाने की जानकारी मिली है।
इस पहलू के सामने आने के बाद जांच की परिधि और बढ़ गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि किन संस्थानों के नाम का इस्तेमाल किया गया, अभ्यर्थियों को वास्तव में कहीं दाखिला दिलाया गया या केवल झांसा दिया गया। विदेश भेजने के लिए उपलब्ध कराए गए दस्तावेज वास्तविक थे या उनमें भी कथित तौर पर हेराफेरी की गई, इसकी भी जांच की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के बाद खुलेगी आगे की कड़ी
पुलिस की अब तक की जांच में सामने आई भूमिकाओं से संकेत मिल रहे हैं कि गिरफ्तार आरोपित पूरे नेटवर्क का एक हिस्सा हो सकते हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के साथ गिरोह के अन्य सदस्यों, उनके संपर्कों, लेनदेन और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है।
अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद अभ्यर्थी जुटाने, प्रमाणपत्र तैयार कराने, रकम के लेनदेन और दाखिले की प्रक्रिया तक की पूरी कड़ी सामने आने की संभावना है।