देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड में सजा पाए दोषियों ने अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य ने कोटद्वार की अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन जेल की सजा को उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कोटद्वार अदालत से पूरा रिकॉर्ड मंगवाया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
हाईकोर्ट ने अंकिता भंडारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी पुलकित आर्य की अपील पर सुनवाई करते हुए कोटद्वार की विशेष अदालत के फैसले से संबंधित पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। यह अपील पुलकित आर्य की ओर से कोटद्वार कोर्ट के आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दायर की गई है। मामले की अगली सुनवाई को 18 नवंबर की तिथि तय की गई है। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले में गंभीरता को देखते हुए निचली अदालत की कार्रवाई से जुड़े सभी दस्तावेज हाईकोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि कोटद्वार की अदालत ने बीती 30 मई को पुलकित आर्य को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 354A (यौन उत्पीड़न) और 201 (सबूत नष्ट करना) के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
बता दें कि 30 मई 2025 को कोटद्वार कोर्ट ने पुलकित आर्य समेत तीन लोगों को अंकिता की हत्या, छेड़छाड़ और सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 47 गवाहों को पेश किया था। हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह मौजूद नहीं है और मृतका का शव नहर (कैनाल) से बरामद हुआ था। वहीं, राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगी सौरभ भास्कर और अंकित की लोकेशन घटनास्थल के आसपास पाई गई थी, जिसकी पुष्टि फोरेंसिक जांच में भी हुई है। सरकारी वकील ने यह भी बताया कि मृतका ने अपने व्हाट्सएप चैट्स में आरोपी के व्यवहार का जिक्र किया था। साथ ही आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने वारदात के दिन रिजॉर्ट के सीसीटीवी कैमरे बंद कराए और डीवीआर में छेड़छाड़ की। मामला पौड़ी जिले के डोभ श्रीकोट निवासी अंकिता भंडारी की हत्या से जुड़ा है, जो ऋषिकेश स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में कार्यरत थी। आरोप है कि रिजॉर्ट स्वामी पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित ने उसे चीला बैराज में धक्का देकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।