रुद्रप्रयाग: देवभूमि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में सावन माह के दौरान आस्था और प्रकृति का अनूठा संगम देखने को मिला। रुद्रप्रयाग मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित विश्वप्रसिद्ध कोटेश्वर महादेव गुफा मंदिर में उफनती अलकनंदा नदी का जल गुफा के भीतर तक पहुंच गया। इस दुर्लभ दृश्य को श्रद्धालु भगवान शिव के प्रति मां अलकनंदा के स्वयं जलाभिषेक के रूप में देख रहे हैं।
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। सामान्य दिनों में गुफा से काफी नीचे बहने वाली नदी का पानी पहली बार गुफा के अंदर तक पहुंच गया। शिवलिंग के समीप पहुंचे जल प्रवाह ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया और मंदिर परिसर में पूरे दिन ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष गूंजते रहे।
श्रद्धालुओं ने बताया दिव्य संयोग
सावन के पावन महीने में सामने आए इस दृश्य को श्रद्धालु दिव्य संयोग और भगवान शिव की विशेष कृपा मान रहे हैं। उनका कहना है कि मानो स्वयं मां अलकनंदा अपने आराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करने गुफा तक पहुंची हों। इस अद्भुत नजारे के वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग इसे देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत का अनुपम उदाहरण बता रहे हैं।
प्रशासन ने जारी की सुरक्षा सलाह
हालांकि, लगातार बारिश के चलते अलकनंदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। तेज बहाव के कारण श्रद्धालु नदी किनारे जाकर पारंपरिक तरीके से जल भरने और जलाभिषेक करने में असमर्थ हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी के किनारे न जाने और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
महंत शिवानंद गिरि ने की संयम बरतने की अपील
कोटेश्वर महादेव मंदिर के महंत शिवानंद गिरि महाराज ने कहा कि यह अत्यंत दुर्लभ और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दृश्य है। उन्होंने कहा कि सावन में मां अलकनंदा का भगवान शिव के चरणों तक पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का विषय है। साथ ही उन्होंने सभी भक्तों से प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्थाओं का पालन करने और नदी के तेज बहाव के बीच किसी भी प्रकार का जोखिम न उठाने की अपील की।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी गुफा तक पहुंचा है। वहीं श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य विज्ञान से परे गहरी आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक अनुभूति का प्रतीक बन गया है। सावन में आस्था और प्रकृति के इस अद्भुत संगम ने एक बार फिर देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक महिमा को देशभर के श्रद्धालुओं के सामने जीवंत कर दिया है।