हरिद्वार: कुंभ मेले की तैयारियों के बीच नया उदासीन अखाड़े में चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। अब तक अखाड़े में कथित “असली और नकली देवता” को लेकर विवाद चल रहा था, लेकिन अब “असली और नकली गणेश दास” को लेकर भी दो गुट आमने-सामने आ गए हैं।
महानिर्वाणी गुट से जुड़े अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने कनखल स्थित नया अखाड़ा परिसर में प्रेस वार्ता आयोजित कर पंजाब से आए एक संत को मीडिया के सामने पेश किया और दावा किया कि वही असली गणेश दास हैं। उनका आरोप है कि जो व्यक्ति स्वयं को अखाड़े का सचिव और गणेश दास बताता रहा है, वह वास्तविक गणेश दास नहीं है और उसके लगाए गए आरोप निराधार हैं।
अखाड़े के मुखिया ने लगाए गंभीर आरोप
नया अखाड़े के मुखिया श्रीमहंत भगतराम महाराज ने दावा किया कि उनके साथ मौजूद संत ही वास्तविक गणेश दास हैं, जो वर्ष 1988 से अखाड़े से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वयं को गणेश दास बताने वाला व्यक्ति वास्तव में कश्मीर सिंह है और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उसे कब और किस प्रक्रिया के तहत अखाड़े का सचिव बनाया गया।
प्रेस वार्ता में मौजूद संत, जिन्होंने स्वयं को असली गणेश दास बताया, ने भी आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष का व्यक्ति फर्जी पहचान का इस्तेमाल करता है और उसके खिलाफ कई गंभीर मामले लंबित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रविंद्रपुरी महाराज ने रखा पक्ष
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि नया अखाड़े का मुख्यालय हरिद्वार में है और यहां भगवान श्रीचंद की प्रतिमाएं सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि अखाड़े के मुख्यालय में नियमित रूप से पूजा-अर्चना की जाती है।
दूसरे गुट ने जांच की मांग दोहराई
वहीं, निरंजनी गुट से जुड़े अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरी महाराज ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच पहले ही शुरू कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि पुलिस, न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिससे स्पष्ट हो सके कि वास्तविक स्थिति क्या है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले स्वयं को गणेश दास बताने वाले संत ने नया अखाड़े के दूसरे गुट पर कथित रूप से “नकली देवताओं” की पूजा और कुंभ स्नान कराने के आरोप लगाए थे। अब दूसरे पक्ष ने भी अपना दावा सार्वजनिक करते हुए विवाद को और गहरा दिया है। फिलहाल मामले में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।