पाकिस्तान लिंक संदिग्ध ट्रांजेक्शन मामले में रुड़की की युवती गिरफ्तार, पूछताछ में कई बड़े खुलासे

हरिद्वार: रुड़की के कलियर क्षेत्र के आसफनगर गांव से गिरफ्तार युवती सोनम से पूछताछ में करोड़ों रुपये के संदिग्ध ऑनलाइन ट्रांजेक्शन नेटवर्क को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच में सामने आया है कि सोनम पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारे पर संचालित एक संदिग्ध नेटवर्क से जुड़ी हुई थी। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की जाती थी।

 

जानकारी के अनुसार सोनम आर्थिक तंगी से जूझ रही थी और काम की तलाश में थी। इसी दौरान गांव की एक युवती ने उसे जम्मू-कश्मीर निवासी उमर का नंबर दिया। सोनम ने उमर से संपर्क किया और धीरे-धीरे संदिग्ध ट्रांजेक्शन नेटवर्क का हिस्सा बन गई। पूछताछ में सोनम ने बताया कि उसकी उमर से घंटों व्हाट्सएप कॉल पर बातचीत होती थी। शुरुआत में करीब एक महीने तक सिर्फ उमर से ही संपर्क रहा, बाद में उसकी बात आदिल और हजीब नाम के लोगों से कराई गई।

 

पुलिस के अनुसार सोनम कभी भी इन लोगों से आमने-सामने नहीं मिली और पूरा संपर्क केवल व्हाट्सएप कॉल के जरिए होता था। जांच में सामने आया है कि सोनम अलग-अलग बैंक खातों से नकदी निकालकर दूसरे खातों में जमा करती थी। वह एटीएम से कैश निकालकर अलग-अलग खातों में करीब 30-30 हजार रुपये जमा करती थी। पुलिस को शक है कि इसी तरीके से करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया गया।

 

जांच एजेंसियों को पता चला है कि सोनम के पास करीब 15 बैंक खातों की जानकारी थी। जैसे ही कोई खाता बंद होता, उसे नया एटीएम कार्ड और पासबुक उपलब्ध करा दी जाती थी। पुलिस का कहना है कि इन खातों में ज्यादातर मुस्लिम खाताधारकों के नाम शामिल हैं। हालांकि सोनम ने अपने निजी बैंक खाते का कभी इस्तेमाल नहीं किया। उसे साफ निर्देश दिए गए थे कि अपने खाते से कोई लेनदेन नहीं करना है।

 

एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि जम्मू में गिरफ्तार राहुल खान के मोबाइल फोन से सोनम का नंबर मिला था। मोबाइल की जांच में बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए, जिन्हें राहुल खान ने सोनम को भेजा था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस हरिद्वार पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से सोनम को गिरफ्तार किया गया।

 

पूछताछ में यह भी सामने आया कि सोनम करीब एक साल से कमीशन पर इस काम में लगी हुई थी। बैंक खातों में रकम आते ही उसे व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा जाता था। यदि वह देर करती तो तुरंत कॉल कर बैंक पहुंचने के लिए कहा जाता था। ज्यादातर दोपहर के समय खातों में रकम ट्रांसफर होती थी।

 

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, रकम कहां से आ रही थी और किन जगहों पर भेजी जा रही थी। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि मामला केवल अवैध ट्रांजेक्शन तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है।

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