देहरादून: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami द्वारा मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब सियासी हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से लंबित कैबिनेट विस्तार के बाद अब सबसे अहम चरण मंत्रियों के बीच विभागों (पोर्टफोलियो) के बंटवारे का है, जिस पर सत्ता और संगठन दोनों की नजरें टिकी हुई हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मंत्रियों को मिलने वाले विभाग ही उनके कद और प्रभाव को तय करेंगे। पर्यटन, ऊर्जा, लोक निर्माण विभाग (लोनिवि), शहरी विकास, गृह, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और आपदा प्रबंधन जैसे विभाग हमेशा से हाईप्रोफाइल माने जाते हैं। ऐसे में इन विभागों का आवंटन सियासी संदेश देने के साथ-साथ भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय करेगा।
कैबिनेट में शामिल नए और पुराने चेहरों के बीच संतुलन बनाना मुख्यमंत्री के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। जहां मदन कौशिक और खजान दास जैसे नेता पहले भी मंत्री रह चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव रखते हैं, वहीं भरत सिंह चौधरी, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा पहली बार कैबिनेट में शामिल हुए हैं। ऐसे में सभी की नजर अहम विभागों पर बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, केवल नए मंत्रियों को ही नहीं बल्कि पुराने मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल की संभावना है। वर्ष 2023 में चंदन रामदास के निधन और मार्च 2025 में प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद कई विभाग मुख्यमंत्री के पास ही थे, जिन्हें अब नए सिरे से बांटा जाएगा।
बताया जा रहा है कि लंबे समय से एक ही विभाग संभाल रहे मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के बाद कुछ विभागों में कटौती या बदलाव किया जा सकता है। वहीं, कुछ मंत्रियों को नए और महत्वपूर्ण विभाग भी दिए जा सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बंटवारा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सियासी रणनीति का हिस्सा भी होगा।
इधर, धामी सरकार के चार साल पूरे होने के अवसर पर 23 से 25 मार्च तक राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।