फूलों की घाटी के जंगल में चार दिन से धधक रही आग, काबू के लिए आसमानी मदद की तैयारी

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चमोली। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी से सटे पुलना-भ्यूंडार जंगल में लगी आग अब भी बेकाबू बनी हुई है। नौ जनवरी से धधक रही यह आग अब इतनी गंभीर हो गई है कि इसे बुझाने के लिए आसमानी मदद की ही उम्मीद बची है। आग पर काबू पाने के लिए या तो बारिश-बर्फबारी का इंतजार किया जा रहा है या फिर हेलिकॉप्टर के जरिए ऊपर से पानी छिड़काव की योजना पर काम हो रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए शासन-प्रशासन भी सतर्क है और क्षेत्र की स्थिति पर सेटेलाइट के जरिए लगातार नजर रखी जा रही है।

कठिन और दुर्गम क्षेत्र बना बड़ी चुनौती

नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत फूलों की घाटी रेंज में पुलना-भ्यूंडार के सामने वाली पहाड़ी पर लगी आग तक वन विभाग की टीमें अब तक नहीं पहुंच पाई हैं। चट्टानी और बेहद खड़े इलाके के कारण पैदल पहुंच संभव नहीं हो पा रही है। वन विभाग ने कई बार प्रयास किए, लेकिन दुर्गम भू-भाग और जोखिम के चलते आग बुझाने में सफलता नहीं मिल सकी।

हेलिकॉप्टर से की गई रेकी, 15 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित

सोमवार को वन विभाग ने जिला प्रशासन से हेलिकॉप्टर की मदद से आग बुझाने का अनुरोध किया था। जिलाधिकारी गौरव कुमार ने मामले से शासन को अवगत कराया। इसके बाद मंगलवार को हेलिकॉप्टर से क्षेत्र की रेकी की गई। सेटेलाइट इमेज के माध्यम से सामने आया है कि आग फूलों की घाटी के दूसरी ओर की पहाड़ी पर फैली हुई है। अनुमान के मुताबिक करीब 15 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आ चुका है।

ऊंचाई, पाला और शुष्क मौसम बढ़ा रहे परेशानी

वन संरक्षक आकाश वर्मा ने बताया कि आग 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले जंगल में लगी है। यह इलाका बेहद दुर्गम है, जहां पहुंचना काफी मुश्किल है। ऊपर से पाला, धुंध और ठंड भी राहत कार्य में बाधा बन रही है। बारिश और बर्फबारी न होने के कारण जंगल पूरी तरह शुष्क है, जिससे आग तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है। वन विभाग की कोशिश है कि आग अन्य क्षेत्रों तक न पहुंचे।

पहले यूकाडा, फिर वायुसेना से मदद की तैयारी

वनाग्नि को लेकर शासन स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। मंगलवार को प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें अब तक किए गए प्रयासों की समीक्षा की गई। मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि नियंत्रण) सुशांत पटनायक ने बताया कि सबसे पहले यूकाडा के हेलिकॉप्टर से आग बुझाने का प्रयास किया जाएगा। यदि इससे भी स्थिति नियंत्रित नहीं होती है तो जरूरत पड़ने पर वायुसेना की मदद लेने के लिए भी पूरी तैयारी की गई है।

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