पौड़ी गढ़वाल। देवप्रयाग-पौड़ी मोटर मार्ग पर खांड्यूसैंण के पास गुलदार के हमले में चार वर्षीय बच्ची की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मंगलवार शाम विधायक राजकुमार पोरी का घेराव करने के बाद बुधवार को प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने तहसीलदार और वन विभाग के एसडीओ को एक दुकान में बंद कर दिया। अधिकारियों को छुड़ाने पहुंचे वन विभाग के डीएफओ महातिम यादव के साथ भी ग्रामीणों की धक्का-मुक्की हुई। डीएफओ के आश्वासन के बाद करीब आधे घंटे तक बंधक रहे दोनों अधिकारियों को मुक्त किया गया। फिलहाल डीएफओ और ग्रामीणों के बीच वार्ता जारी है।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार तीन नवंबर की शाम करीब छह बजे खांड्यूसैंण में गुलदार ने चार वर्षीय आरुषि पर हमला कर उसे अपना निवाला बना लिया। घटना के बाद क्षेत्र में ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। शाम करीब 7:30 बजे पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे तो ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया। कुछ ग्रामीण विधायक की गाड़ी पर चढ़ गए और जमकर नारेबाजी की। पुलिसकर्मी लगातार ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान विधायक काफी देर तक अपनी कार के भीतर ही बैठे रहे।
रात करीब 10:15 बजे विधायक कार से बाहर आए और ग्रामीणों से बातचीत कर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और विधायक का काफिला मौके से रवाना हो गया।
सुबह आठ बजे से सड़क पर धरना, अधिकारियों को बनाया बंधक
बुधवार चार नवंबर को ग्रामीणों ने सुबह करीब आठ बजे पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर धरना शुरू कर दिया और सड़क जाम कर दी। सुबह नौ बजे तक मार्ग पूरी तरह बंद रहा। ग्रामीणों को समझाने पहुंचे पौड़ी के तहसीलदार राजेंद्र गोस्वामी और वन विभाग की एसडीओ आयशा बिष्ट को भी विरोध का सामना करना पड़ा। धीरे-धीरे ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता गया और करीब 11:30 बजे उन्होंने दोनों अधिकारियों को एक दुकान में बंद कर दिया।
वन्यजीवों के हमलों से दहशत में ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले कुछ समय से वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन वन विभाग और शासन-प्रशासन की ओर से सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि अब लोग अपने घरों के आंगन और आसपास के रास्तों पर भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। छोटे बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी अभिभावक डर रहे हैं।
डीएफओ के आश्वासन पर अधिकारियों को छोड़ा
तहसीलदार और एसडीओ को बंधक बनाए जाने की सूचना मिलने पर वन विभाग के डीएफओ महातिम यादव मौके पर पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों और डीएफओ के बीच धक्का-मुक्की हुई। बाद में डीएफओ की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने करीब आधे घंटे से दुकान में बंद दोनों अधिकारियों को मुक्त कर दिया। इसके बाद डीएफओ और ग्रामीणों के बीच बातचीत शुरू हुई। हालांकि, ग्रामीणों का सड़क पर धरना जारी रहा।