देहरादून : पंचायती अखाड़ा निरंजनी ने जापान के संत आदित्यानंद पुरी को महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की है। निरंजनी अखाड़ा परिषद और अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी ने विधिवत पट्टाभिषेक कर उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी। यह कार्यक्रम सोमवार शाम एसएमजेएन पीजी कॉलेज परिसर, देहरादून में धार्मिक विधि-विधान के साथ आयोजित किया गया।
समारोह के दौरान चादर विधि के अनुसार सभी संत-महात्माओं ने आदित्यानंद पुरी को चादर ओढ़ाकर सम्मानित किया। वैदिक मंत्रोच्चारण और पुष्पवर्षा के बीच उन्हें निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर घोषित किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर जापान से आए उनके 15 शिष्य भी मौजूद रहे। इनमें मोकोतोऊ, यूकेरी, ह्यू, केनतारो, डीका सीमोजो, सतोमी कवामरा, मोमो औखुरा, यूसिको और डाइजी सबाकी बाला सहित अन्य शिष्य शामिल थे।
निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि महामंडलेश्वर का पद केवल सम्मान नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा, समाज को सही मार्ग दिखाने और आध्यात्मिक चेतना के विस्तार की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आदित्यानंद पुरी जैसे युवा और ऊर्जावान संत सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और अखाड़ा परंपरा को नई दिशा देंगे।
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष महंत प्रेम गिरि ने कहा कि आज पूरी दुनिया सनातन संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है। महामंडलेश्वर आदित्यानंद पुरी विश्व स्तर पर भारत की आध्यात्मिक विरासत और सनातन परंपरा का संदेश फैलाने का कार्य करेंगे।
वहीं महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि ने कहा कि आदित्यानंद पुरी जापानी समाज को सनातन धर्म के मूल्यों, योग, साधना और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम में महंत महेश पुरी और महंत दर्शन भारती ने भी गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की मजबूत नींव है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी सनातन मूल्यों को जीवित रखती है।