देहरादून। उत्तराखंड में इस साल शुरू होने जा रही जनगणना के दौरान ठगी न हो, इसके लिए विशेष सुरक्षा और पारदर्शिता के इंतजाम किए गए हैं। राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि जनगणना टीम द्वारा ली जाने वाली जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी और इसे किसी भी मंच, फोरम या कोर्ट में साझा नहीं किया जाएगा।
QR कोड वाली आईडी से होगी प्रगणकों की पहचान
जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि सभी प्रगणकों को एक विशेष आईडी दी जाएगी, जिसमें QR कोड होगा। इसे स्कैन करने पर पता चलेगा कि प्रगणक किस विभाग का कर्मचारी है और वर्तमान में जनगणना में कहां ड्यूटी पर तैनात है। इस व्यवस्था से किसी भी तरह की ठगी और धोखाधड़ी की संभावना न्यूनतम हो जाएगी।
लोगों में डर नहीं होगा
निदेशक ने कहा कि जनगणना टीम जिस क्षेत्र में जाएगी, वहां के प्रधान, पार्षद और अन्य गणमान्य लोगों के माध्यम से पूरे क्षेत्र में जनगणना की जानकारी दी जाएगी। इससे स्थानीय लोगों में किसी अनजान व्यक्ति को लेकर डर नहीं रहेगा।
जानकारी रहेगी पूरी तरह गोपनीय
ईवा आशीष श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि जनगणना में दी गई जानकारी को आरटीआई में साझा नहीं किया जा सकता। पुलिस, कोर्ट या किसी अन्य मंच पर यह व्यक्तिगत जानकारी उजागर नहीं होगी। केंद्र सरकार तक भी यह आंकड़े केवल सांख्यिकीय रूप में ही जाएंगे।
जनगणना से बनेगा विकास का रोडमैप
पहली बार स्वतंत्र भारत में 1951 में हुई जनगणना से सरकार को वास्तविक स्थिति का पता चलता रहा है। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, एलपीजी योजना और बिजली गांव-गांव तक पहुंचाने जैसी योजनाएं शुरू की गई थीं। इस बार की ताजा जनगणना से राज्य के हर क्षेत्र के विकास की दिशा तय करने में मदद मिलेगी।