पंजाब: पंजाब इस समय दशकों की सबसे भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। राज्य के सभी 23 ज़िले प्रभावित हुए हैं और हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। ताज़ा जानकारी के मुताबिक, अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 3.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ की चपेट में 1,600 से ज़्यादा गाँव आ चुके हैं।
बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों में पानी भरने से लोग बेघर हो गए हैं। कई गाँवों में सड़कें और पुल टूट गए हैं। राहत कैंपों में लोगों को अस्थायी ठिकाना दिया गया है।
लोगों का कहना है कि इस बार की बाढ़ ने दशकों का सबसे बड़ा संकट खड़ा कर दिया है, लेकिन उम्मीद है कि सरकार और समाज मिलकर जल्द ही हालात सुधारेंगे।

फसलों को भारी नुकसान
जानकारी के अनुसार बाढ़ ने खरीफ सीजन की धान और सब्ज़ियों की फसलों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है। हजारों एकड़ ज़मीन पर अब खेतों की जगह सिर्फ पानी ही दिखाई दे रहा है। किसान अब मुआवज़े की आस लगाए बैठे हैं।
राहत और बचाव अभियान

राज्य सरकार के मुताबिक अब तक 5,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। NDRF, SDRF, सेना और BSF की टीमें लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। गुरुदासपुर के डेरा बाबा नानक का दौरा कर राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को राहत कार्य तेज़ करने के निर्देश दिए।
हालांकि राहत अभियान में बोटों की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार के पास 257 नावें तो हैं लेकिन उनमें से केवल 114 पर इंजन लगे हैं। ऐसे में कई इलाकों में फंसे लोगों तक मदद पहुँचाने में मुश्किलें आ रही हैं।
नेताओं और सेलेब्रिटीज़ का सहयोग
पंजाब के हालात देखते हुए राजनीतिक और फिल्मी दुनिया से भी मदद की अपील सामने आई है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी के सभी विधायक अपनी एक महीने की सैलरी राहत कोष में देंगे।
वहीं, बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ जैसे शाहरुख़ खान और संजय दत्त ने सोशल मीडिया के ज़रिए पंजाब के साथ खड़े होने का संदेश दिया और मदद का आश्वासन दिया।
राज्य सरकार की तैयारी
पंजाब सरकार ने केंद्र से तत्काल राहत राशि जारी करने की मांग की है। प्रशासन ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित हर परिवार तक जल्द से जल्द राशन, दवाइयाँ और टेंट पहुँचाए जाएंगे।
लगातार हो रही बारिश और नदियों के उफान ने पंजाब के हालात गंभीर कर दिए हैं। सरकार का कहना है कि फिलहाल राहत कार्य युद्ध स्तर पर चल रहे हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर तबाही से निपटने के लिए केंद्र और समाज दोनों के सहयोग की ज़रूरत है।