उत्तराखंड का त्रियुगी नारायण मंदिर जहां लोग करते हैं शादी, कभी शिव-पार्वती ने लिए थे फेरे जानिए क्या है इतिहास और कैसे आप भी कर सकते हैं यह शादी

Tha Jag Samachar

( Triyuginarayan Temple)

Uttrakhand: उत्तराखण्ड को देवों की भूमि कहा जाता है। इस भूमि की अपनी एक अलग पहचान है क्यूकी यहाँ देवों का वास है , यहाँ कोने कोने में कण कण में भगवान बसते हैं हिमालय की गोद में बसा उत्तराखण्ड जहां हर मंदिर का अपना एक अलग महत्व है एक अपना इतिहास है जिसका ज़िक्र कई वेदों पूरणों, गीता में पाया जाता है। देवभूमि उत्तराखंड में कई मंदिरों के बीच एक ऐसा मंदिर है जो की डेस्टिनेशन वेडिंग के लिये काफ़ी फेमस हो चुका है, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के बीच त्रियुगिनारायण मंदिर जहां दूर दूर से जोड़े शादी के बंधन में बंधने के लिए आते हैं।

आख़िर क्या है इस मंदिर की ख़ासियत की दूर दूर से यहाँ जोड़े शादी करने के लिए आते हैं? क्या है इस मंदिर का इतिहास आइये बताते हैं। 

( Who got married at Triyuginarayan Temple?

त्रियुगिनारायण मंदिर उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग ज़िले के त्रियुगिनारायण गाँव में स्थित एक हिंदू मंदिर है। वैसे ये मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है यहाँ विष्णु के पाँचवे अवतार, वामन अवतार की पूजा की जाती है, पर अगर इस मंदिर की प्रसिद्धता की बात करें तो यहाँ लोग दर्शन करने के साथ ही अपने शादीशुदा जीवन की सुख शांति की कामना के लिए ज़रूर पहुंचते हैं। क्योंकि इसी स्थान पर भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था जिसे में भगवान विष्णु ने देवी पार्वती के भाई का कर्तव्य निभाया और विवाह की रस्मों को पूरा किया और वहीं ब्रह्म देव ने विवाह के पुरोहित के रूप में विवाह को संपूर्ण कराया। हिंदू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव की पहली पत्नी माता सती ने उनके पिता राजा दक्ष द्वारा शिव के अपमान किए जाने पर प्राण त्याग दिये थे। जिसके बाद माता सती ने देवी पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया। देवी पार्वती ने उत्तराखंड के गौरीकुंड नामक स्थान पर कई वर्षों तक भगवान शंकर को पाने के लिए कठोर तपस्या की जिससे माता पार्वती ने शिव को पाया। अगर बात करें इस मंदिर के ख़ास होने की तो, इस मंदिर के आगे एक अखंड अग्नि हमेशा जलती ही रहती है, जो माना जाता है की दिव्य विवाह के समय से जलती आ रही है। इसी धूनी के चारो ओर फ़ैरे लेकर भगवान शिव और देवी पार्वती शादी के पवित्र बंधन में बंधे थे। इसीलिए इस मंदिर को अखंड धूनी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, और अभी तक इस धूनी को जीवित रखा गया है। इस मंदिर का निर्माण त्रेतायुग में किया गया था, और यह अखंड धूनी तीन युगों से जलती आ रही है जिस कारण इस मंदिर को त्रियुगी मंदिर कहा जाता है।

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इस मंदिर में भगवान विष्णु की एक प्रतिमा है, जिसके साथ उनकी पत्नी- धन की देवी लक्ष्मी और संगीत और शिक्षा की देवी सरस्वती भी विराजमान हैं। इस मंदिर की स्मृति केदारनाथ धाम मंदिर के जैसी ही है। साथ ही मंदिर प्रांगण में चार कुंड सरस्वती कुंड, रुद्र कुंड, विष्णु कुंड, और ब्रह्मा कुंड स्थित हैं।

 

चलिए हम आपको बताते हैं कि यहाँ विवाह करने के लिए क्या करना होता है?

(Can I get married in Triyuginarayan Temple)

बात करें अगर यहाँ शादी करने की तो यहाँ मंदिर में शादी करने के लिए सबसे पहले रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है, जिसके लिये कुछ फ़ीस देनी पड़ती है और जोड़ो को आधार कार्ड और फ़ोन नंबर भी मंदिर समिति के पास रजिस्टर करवाना पड़ता है। शादी करने वाले जोड़ों के माता पिता की सहमति के बाद ही मंदिर समिति शादी करवाती है। जब रजिस्ट्रेशन हो जाता है उसके बाद जोड़ो को शादी की एक तारीक देदी जाती है, जिसके बाद शादी करने के लिए जोड़ों को कुछ रुपए देने होते हैं, जिसमें उनके विवाह का सारा इंतज़ाम किया जाता है। जिसके साथ ही 15 लोग लड़के वालों की तरफ़ से तो 15 लोग लड़की वालों की तरफ़ से आ सकते हैं। यहाँ पर शादी करना एक पवित्र बंधन माना जाता है, और माना जाता है कि साक्षात् शिव और पार्वती का आशीर्वाद मिलता है। इस मंदिर की मान्यता है कि यहाँ विवाह करने से जीवन ख़ुशियों से भर जाता है। इसके साथ ही जो लोग यहाँ दर्शन करने आते हैं वो आंखंड धूनी की भस्म भी अपने साथ लेकर जाते हैं ताकि वैवाहिक जीवन मैं आई कोई भी बाधा दूर हो जाय और और जीवन सुखों से भर जाए।

 

2025 में हुई पांच सौ शादियां

क्षेत्र की वेडिंग प्लानर रंजना रावत के मुताबिक, 07 से 09 मई के बीच सिंगापुर में कार्यरत भारतीय मूल की डॉक्टर प्राची, यहां शादी करने के लिए पहुंच रही है। इसके लिए उन्होने जीएमवीएन टीआरएच बुक किया हुआ है। उन्होंने बताया कि इस साल अप्रैल माह तक ही यहां करीब पांच सौ शादियां हो चुकी हैं, जबकि 2024 में कुल छह सौ शादियां ही हुई थी। उन्होंने बताया कि अब तक यहां इसरो के एक वैज्ञानिक, अभिनेत्री चित्रा शुक्ला, कविता कौशिक, निकिता शर्मा, गायक हंसराज रघुवंशी, youtuber आदर्श सुयाल, गढ़वाली लोकगायक सौरभ मैठाणी के साथ ही कई, जानी मानी हस्तियां सात फेरे ले चुके हैं।

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