देहरादून: उत्तराखंड में मानसून के दौरान गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित प्रसव व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष कार्ययोजना तैयार की है। सरकार ने फैसला लिया है कि आपदा या सड़क मार्ग बाधित होने की स्थिति में जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को हेलीकॉप्टर के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को संभावित प्रसव तिथि से 10 से 15 दिन पहले अस्पतालों के नजदीक स्थित बर्थ वेटिंग होम में शिफ्ट किया जाएगा।
प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में हर साल मानसून के दौरान भूस्खलन और सड़क बंद होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे में कई बार गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सकता, जिससे जच्चा-बच्चा दोनों की जान जोखिम में पड़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनकी सूची तैयार की है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर माह के लिए गर्भवती महिलाओं की निगरानी की विशेष व्यवस्था की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, नैनीताल जिले में 2,487, टिहरी में 1,796, चमोली में 892 और रुद्रप्रयाग जिले में 862 महिलाओं के प्रसव होने हैं। अन्य जिलों से भी माहवार प्रसव संबंधी जानकारी मांगी गई है।
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। आशा कार्यकर्ता और एएनएम नियमित रूप से उनके संपर्क में हैं और समय-समय पर स्वास्थ्य संबंधी सलाह दे रही हैं। साथ ही टेली कंसल्टेंसी के माध्यम से भी चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों में बर्थ वेटिंग होम और वेटिंग रूम की व्यवस्था भी की है, ताकि प्रसव तिथि नजदीक आने पर महिलाओं को पहले से सुरक्षित स्थान पर रखा जा सके। जरूरत पड़ने पर होटल या अन्य भवन किराये पर लेकर भी उनके ठहरने की व्यवस्था की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. शिखा जगपांगी ने बताया कि मानसून के दौरान गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग के लिए विशेष सेल सक्रिय है। अक्टूबर तक की संभावित डिलीवरी वाली महिलाओं की सूची तैयार कर ली गई है। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और निकट प्रसव तिथि वाली महिलाओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि समय रहते उन्हें अस्पताल पहुंचाकर सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि आपात स्थिति में हेली सेवा का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। सरकार का उद्देश्य मानसून के दौरान किसी भी गर्भवती महिला को उपचार और प्रसव सुविधा से वंचित न रहने देना है।