देहरादून: राजधानी देहरादून को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने वाली बहुप्रतीक्षित रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना को अभी अंतिम मंजूरी मिलने में और समय लगेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने परियोजना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोबारा हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कराने का निर्णय लिया है।
उत्तराखंड सरकार की ओर से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अंतिम स्वीकृति के लिए एनएचएआई को भेजी जा चुकी है। इसके बाद एनएचएआई ने परियोजना को हरी झंडी देने से पहले भौतिक (फिजिकल) पद्धति से दोबारा हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन कराने का फैसला लिया है। यह अध्ययन बहादराबाद स्थित सिंचाई अनुसंधान संस्थान (आईआरआई) द्वारा किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि इससे पहले आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट में इस परियोजना को सुरक्षित माना गया था, लेकिन एनएचएआई किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहता। इसलिए इस बार केवल गणितीय मॉडल के बजाय धरातल पर विस्तृत परीक्षण कराया जाएगा।
अध्ययन के दौरान दून घाटी में पिछले 100 वर्षों के दौरान हुई रिकॉर्ड बारिश और बाढ़ के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। विशेषज्ञ यह परखेंगे कि प्रस्तावित एलिवेटेड रोड भविष्य में संभावित भीषण बाढ़ और जलप्रवाह का सुरक्षित रूप से सामना कर सकेगी या नहीं। इसके अलावा परियोजना के अन्य तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं का भी परीक्षण किया जाएगा।
लोक निर्माण विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत रिस्पना और बिंदाल नदी के ऊपर करीब 26 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाना प्रस्तावित है। परियोजना के पूरा होने के बाद शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव कम होगा और बाहरी वाहनों को देहरादून शहर में प्रवेश किए बिना आवागमन की सुविधा मिलेगी।
लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज पांडे ने बताया कि परियोजना की डीपीआर एनएचएआई को भेज दी गई है। अंतिम स्वीकृति से पहले एनएचएआई के निर्देश पर एक और हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कराई जा रही है, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।