देहरादून। उत्तराखंड सरकार प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए नई उत्तराखंड इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2026 लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स में 100 प्रतिशत तक की छूट देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही महिलाओं को अतिरिक्त लाभ देने की भी योजना है। संभावना है कि आगामी कैबिनेट बैठक में इस नीति को मंजूरी मिल सकती है।
नई ईवी नीति का उद्देश्य उत्तराखंड को देश का सबसे अधिक ईवी-अनुकूल पर्वतीय राज्य बनाना है। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ाने के साथ-साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी निर्माण, रिसर्च, डिजाइन, नवाचार और कौशल विकास को भी प्रोत्साहित करना चाहती है।
2030 तक का बड़ा लक्ष्य
सरकार ने वर्ष 2030 तक उत्तराखंड को ईवी अपनाने और निर्माण के क्षेत्र में देश का अग्रणी हिल स्टेट बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत राज्य में पंजीकृत होने वाले हर पांच नए वाहनों में एक इलेक्ट्रिक वाहन शामिल करने की योजना है। साथ ही ईवी निर्माण और सहायक उद्योगों में 5,000 से 7,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित कर 6,000 से 12,000 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर प्रत्येक 50 किलोमीटर की दूरी पर चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे, जिससे ईवी उपयोगकर्ताओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
खरीददारों और उद्योगों को मिलेगा लाभ
प्रस्तावित नीति के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। ईवी खरीद पर 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट की संभावना है।
चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने वालों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। मैदानी क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन लगाने पर स्थायी पूंजी निवेश का 80 प्रतिशत और पर्वतीय क्षेत्रों में 90 प्रतिशत तक प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा 14 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले पहले 200 चार्जिंग प्लग पर अधिकतम 10 लाख रुपये प्रति प्लग और 120 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले पहले 20 चार्जिंग प्लग पर 25 लाख रुपये तक का प्रोत्साहन देने की योजना है।
पर्यावरण संरक्षण और रोजगार पर फोकस
नीति का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, वायु गुणवत्ता में सुधार लाना और भारत के 2070 तक कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य में योगदान देना है। सरकार पर्यटन स्थलों, तीर्थ मार्गों और राष्ट्रीय उद्यानों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना चाहती है।
साथ ही ईवी निर्माण, बैटरी रीसाइक्लिंग, मरम्मत, रखरखाव और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में युवाओं के लिए नए रोजगार और कौशल विकास के अवसर पैदा किए जाएंगे।
परिवहन मंत्री Pradeep Batra ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार जल्द ही ईवी नीति को लागू करेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर विशेष छूट के साथ महिलाओं के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया गया है।