महाशिवरात्रि पर दुर्लभ शुभ योगों का संयोग, जानिए व्रत-पूजन का शुभ मुहूर्त और विशेष उपाय

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इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत विशेष संयोगों के साथ मनाया जाएगा। कई वर्षों बाद एक साथ अनेक शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव और व्यतिपात योग भी रहेंगे। ग्रह-नक्षत्रों की यह विशेष स्थिति इस महापर्व को और अधिक फलदायी बना रही है।

नारायण ज्योतिष संस्थान के आचार्य विकास जोशी के अनुसार भगवान शिव की त्रिगुणी सृष्टि है और शिव पूजन तीन प्रकार से बताया गया है — सात्विक, राजसिक और तामसिक। साधक जिस भाव से शिव की उपासना करता है, उसी भाव के अनुसार भगवान फल प्रदान करते हैं।

पूजन के तीन प्रकार

सात्विक पूजन

दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, पुष्प, मिठाई और फल अर्पित किए जाते हैं।

राजसिक पूजन

भांग, धतूरा, रुद्राक्ष और कमल पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

तामसिक पूजन (अघोर साधना)

भस्म की आरती और भस्म श्रृंगार से भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है।

महाशिवरात्रि की रात्रि में किए गए सभी प्रकार के पूजन विशेष फल प्रदान करते हैं। यह रात्रि केवल व्रत और उपवास का अवसर नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और शिव कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ संयोग है।

महाशिवरात्रि व्रत और तिथि

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी, रविवार को सायं 5 बजकर 4 मिनट से प्रारंभ होगी और 16 फरवरी, सोमवार को सायं 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। चतुर्दशी तिथि रात्रि में पड़ने के कारण 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाएगा।

चार प्रहरों में विशेष शिव पूजन

महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में विभाजित कर पूजन करना शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना गया है:

प्रथम प्रहर: 15 फरवरी सायं 6:11 बजे से रात्रि 9:22 बजे तक

द्वितीय प्रहर: 15 फरवरी रात्रि 9:23 बजे से 16 फरवरी रात्रि 12:34 बजे तक

तृतीय प्रहर: 16 फरवरी रात्रि 12:35 बजे से प्रातः 3:46 बजे तक

चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी प्रातः 3:46 बजे से प्रातः 6:59 बजे तक

निशीथ काल पूजा: 16 फरवरी रात्रि 12:09 बजे से 1:01 बजे तक, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है।

विशेष उपाय और अभिषेक

महाशिवरात्रि पर पाँच बिल्वपत्रों पर “राम” लिखकर भगवान शिव को अर्पित करने से धन संबंधी कष्ट दूर होते हैं।तीन पत्तों पर केसर और चंदन से “ॐ नमः शिवाय” लिखकर अर्पित करने से पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।

अभिषेक के विशेष फल

दूध से — मन की शांति के लिए

गन्ने के रस से — धन प्राप्ति के लिए

सरसों के तेल से — शत्रु नाश के लिए

गिलोय के रस से — आरोग्य के लिए

गंगाजल से — शिव भक्ति की प्राप्ति के लिए

महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और कल्याण का संदेश लेकर आया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया पूजन विशेष फलदायी माना गया है।

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