देहरादून | उत्तराखंड में शहरी गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद ली जाएगी। बिजली, पानी, ट्रैफिक, सड़क और परिवहन से जुड़ी समस्याओं की पहचान और समाधान के लिए एआई आधारित तकनीक लागू की जा रही है। इसकी शुरुआत राजधानी देहरादून के राजपुर रोड और सहस्त्रधारा रोड से की गई है, जहां पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है।
तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू
शहरी विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग निकायों में विकास को नई दिशा देने के लिए तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने जा रहा है। नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एआई आधारित पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत आधुनिक कैमरों और एआई तकनीक की मदद से शहर की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
शहरी विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव नितेश झा ने बताया कि यदि देहरादून में यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो इसे प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू किया जाएगा।
इन क्षेत्रों में हो रहा पायलट प्रोजेक्ट
पायलट प्रोजेक्ट के लिए शहर के व्यस्त और महत्वपूर्ण मार्गों को चुना गया है। क्लोज-लूप रूट राजपुर गांव से शुरू होकर राजपुर रोड होते हुए घंटाघर तक जाएगा। इसके बाद सहस्रधारा क्रॉसिंग से सहस्रधारा रोड होते हुए आईटी पार्क तक की सड़कों को इस योजना में शामिल किया गया है।
पांच मॉड्यूल पर एक साथ काम
एआई आधारित इस अभियान के तहत पांच प्रमुख क्षेत्रों पर एक साथ काम किया जाएगा।
बुनियादी ढांचा: सड़कों, नालियों की स्थिति,
साइनबोर्ड और स्ट्रीट लाइट की निगरानी
स्वच्छता: कूड़े के ढेर और गंदगी वाले हॉटस्पॉट की पहचान
अतिक्रमण: अवैध होर्डिंग्स और कब्जों का पता लगाना
यातायात: अवैध पार्किंग पर नजर
सड़क सुरक्षा: बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों की पहचान
इस तरह काम करेगी एआई प्रणाली
सड़कों की तस्वीरें लेने के लिए विशेष कैमरे वाहनों पर लगाए जाएंगे। इन तस्वीरों का विश्लेषण एआई मॉडल द्वारा किया जाएगा। इसके बाद फिजिकल वेरिफिकेशन कर डेटा की पुष्टि होगी। अंत में सभी जानकारियों को एक डिजिटल डैशबोर्ड पर मैप के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे संबंधित अधिकारी तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे।
चरणबद्ध होगी कार्रवाई
इस सिस्टम के तहत शुरुआत में हर 15 दिन में कार्रवाई की जाएगी। बाद में इसे एक माह और फिर एक वर्ष में दो बार दोहराने की योजना है। विभाग का मानना है कि इससे शहरी समस्याओं पर त्वरित और प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
एआई आधारित यह पहल उत्तराखंड में स्मार्ट और जवाबदेह शहरी प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।