चमोली जिले में लोको ट्रेनों की टक्कर की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश , 88 घायल

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चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगाड–पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की सुरंग के भीतर दो लोको ट्रेनों की टक्कर के मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। मंगलवार रात हुए इस हादसे में कुल 88 श्रमिक और कर्मचारी घायल हुए थे, जिनमें से 84 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि चार अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। राहत की बात यह है कि किसी भी घायल की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही है।

पीपलकोटी में घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद जिलाधिकारी गौरव कुमार ने मजिस्ट्रेटी जांच के निर्देश जारी किए। इस दौरान जिलाधिकारी के साथ पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने भी परियोजना के टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) स्थल का निरीक्षण किया और परियोजना अधिकारियों से घटना की विस्तृत जानकारी ली।

जिलाधिकारी गौरव कुमार ने परियोजना अधिकारियों को भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यस्थल पर श्रमिकों के प्रवेश और निकास से जुड़े रजिस्टर का निरीक्षण करते हुए उसे नियमित रूप से अपडेट रखने को भी कहा। साथ ही टीएचडीसी के महाप्रबंधक को श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक इंतजाम पुख्ता करने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी हादसे का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों से पूरी जानकारी ली और घायलों के बेहतर व समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि श्रमिकों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसा सुरंग के भीतर करीब दो किलोमीटर अंदर हुआ। रात की पाली में श्रमिकों को ले जा रही लोको ट्रेन जब आगे बढ़ रही थी, तभी दूसरी ओर से निर्माण सामग्री लेकर आ रही एक अन्य लोको ट्रेन अनियंत्रित होकर उससे टकरा गई। उस समय लोको ट्रेन में कुल 109 लोग सवार थे, जिनमें अधिकांश श्रमिक थे।

इस बीच रेलवे ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि सुरंग के भीतर टकराई लोको ट्रेनें भारतीय रेलवे से संबंधित नहीं हैं। यह परियोजना स्थल के अंदर श्रमिकों और सामग्री के परिवहन में इस्तेमाल होने वाली स्थानीय ट्रॉलीनुमा व्यवस्था है, जिसे आम बोलचाल में लोको ट्रेन कहा जाता है। अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि इसका भारतीय रेलवे से कोई संबंध नहीं है।

अलकनंदा नदी पर हेलंग और पीपलकोटी के बीच बन रही इस जलविद्युत परियोजना में चार टरबाइनों के माध्यम से कुल 444 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना को अगले वर्ष तक पूरा किए जाने की योजना है।

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