हरिद्वार। करीब 18 दिनों की वार्षिक बंदी के बाद हरिद्वार से गुजरने वाली गंगनहर में एक बार फिर पानी का प्रवाह शुरू हो गया है। रविवार रात उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने भीमगोड़ा बैराज से गंगनहर में पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की। नहर में पानी पहुंचने के साथ ही हरकी पैड़ी समेत गंगनहर से जुड़े घाटों पर रौनक लौटने लगी है। गंगा स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भी अब घाटों पर पर्याप्त जल उपलब्ध होने लगा है।
गंगनहर की वार्षिक बंदी के दौरान कुंभ मेले से जुड़े निर्माण और मरम्मत कार्यों ने भी गति पकड़ी। इस अवधि में 10 नए घाटों का निर्माण किया गया, जबकि 56 पुराने घाटों की मरम्मत का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। हालांकि, कुंभ मेला प्रशासन ने यूपी सिंचाई विभाग को पत्र लिखकर गंगनहर का क्लोजर बढ़ाने का अनुरोध किया था, लेकिन सिंचाई विभाग ने निर्धारित समय पर ही नहर में पानी छोड़ दिया।
दशहरे की रात से बंद थी गंगनहर
गंगनहर की वार्षिक बंदी दशहरे की रात से शुरू हुई थी। करीब 18 दिनों तक पानी रोके जाने के दौरान हरिद्वार से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक नहर से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में मरम्मत और सफाई के कार्य किए गए। इस दौरान नहर में जमा सिल्ट हटाने के साथ ही क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त किया गया।
सफाई और मरम्मत के लिए होती है वार्षिक बंदी
हर साल गंगनहर में पानी रोकने का मुख्य उद्देश्य नहर की सफाई, सिल्ट हटाना और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत करना होता है। इसके अलावा नहर से जुड़े पुलों, रेगुलेटर, नहर पटरी और सिंचाई व्यवस्था से संबंधित जरूरी कार्य भी इसी अवधि में किए जाते हैं। इस बार बंदी के दौरान कुंभ मेले की तैयारियों से जुड़े घाटों के निर्माण और मरम्मत के कार्यों को भी पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।