देहरादून | उत्तराखंड में मानव–वन्यजीव संघर्ष एक बार फिर गंभीर होता नजर आ रहा है। ठंड बढ़ने के साथ भालुओं के हाइबरनेशन में जाने और हमलों में कमी की उम्मीद थी, लेकिन भालू के हमले अब भी जारी हैं। इसके साथ ही बाघ के हमलों में तेजी ने चिंता और बढ़ा दी है।
इस महीने छह लोगों की मौत
प्रदेश में इस महीने अब तक वन्यजीव हमलों में छह लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से चार लोगों की मौत बाघ के हमलों में, दो लोगों की मौत तेंदुओं के हमलों में हुई है।
बाघ के हमले कालागढ़ टाइगर रिजर्व, रामनगर और तराई पूर्वी वन प्रभाग क्षेत्र में सामने आए हैं।
वहीं तेंदुओं के हमलों में नैनीताल वन प्रभाग में एक महिला और पौड़ी जिले के बाड़ा गांव में एक व्यक्ति की जान गई।
भालू के हमले भी नहीं हुए कम
वन विभाग को उम्मीद थी कि तापमान गिरने पर भालू हाइबरनेशन में चले जाएंगे और हमलों में कमी आएगी, लेकिन भालू के हमलों की घटनाएं अभी भी सामने आ रही हैं। इससे साफ है कि मानव–वन्यजीव संघर्ष फिलहाल कम होता नहीं दिख रहा।
बाघों का ब्रीडिंग सीजन, सतर्कता जरूरी
प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा ने कहा, “यह समय बाघों के ब्रीडिंग का है। लोगों को जंगल जाने से बचना चाहिए। यदि जरूरी हो तो समूह में जाएं, आवाज करते रहें और पूरी सुरक्षा बरतें। वन विभाग लोगों को जागरूक करने के साथ सुरक्षात्मक कदम भी उठा रहा है।”
वन विभाग की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय लोगों की सतर्कता और जागरूकता ही इस खतरे को कम करने में सबसे अहम भूमिका निभा सकती है।